अनूप जायसवाल, धुरकी (गढ़वा)
झारखंड की सीमा से सटे उतर प्रदेश में बन रहे कनहर डैम से झारखंड के डूब रहे गांवों के खिलाफ राजनीतिक दल मुखर होने लगे हैं. यूपी के कनहर डैम के बनने से जहां झारखंड को कोई लाभ नहीं हो रहा है, वहीं इसके धुरकी प्रखंड में पड़ने वाले भूमफोर, फेफ्सा, शुरू व परास पानी गांव पूरी तरह से डूब रहे हैं.
यूपी सरकार ने इन डूब क्षेत्र से विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के लिए न तो कोई पुनर्वास की व्यवस्था की है और न ही उनके लिए कोई मुआवजा का प्रावधान. इस आशय का समाचार प्रभात खबर में प्रकाशित होने में झारखंड सरकार के पूर्व जल संसाधन मंत्री सह झाविमो नेता रामचंद्र केसरी ने उतर प्रदेश के अमवार गांव में बनने वाले इस डैम का निरीक्षण कर उसकी जानकारी ली.
श्री केसरी ने मौके पर उपस्थित उक्त परियोजना से जुड़े कार्यपालक अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव (यूपी) से इस संबंध में जानकारी मांगी. कार्यपालक अभियंता द्वारा झारखंड के डूबने वाले गांवों को किसी भी तरह के मुआवजा व पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने की बात पर श्री केसरी ने यूपी सरकार के इस रवैये की आलोचना की. उन्होंने कार्यपालक अभियंता को चेतावनी दी कि यदि यूपी सरकार झारखंड के डूब क्षेत्र के लिए मुआवजा व पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करती है, तो झाविमो इसके खिलाफ आंदोलन करेगा.
कनहर परियोजना के कार्यपालक अभियंता ने श्री केसरी की मांग को जायज बताते हुए इस संबंध में यूपी सरकार से बात कर उसकी जानकारी देने का आश्वासन दिया. श्री केसरी के साथ दिनेश शर्मा, उमाशंकर जायसवाल, हरिनारायण यादव, प्रदीप कोरवा, गोपाल कोरवा आदि भी शामिल थे.
