राष्ट्रीय अध्यक्ष के फोन आने के बाद मन बदलाप्रतिनिधि, गढ़वा. भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे कन्हैया चौबे अंतत: मान गये और नामांकन के अंतिम दिन उन्होंने नाम वापस ले लिया. लेकिन इस बीच नामांकन के दो दिन पूर्व से नामांकन के अंतिम दिन तक भवनाथपुर इलाके में कन्हैया चौबे को बागी प्रत्याशी बनकर भाजपा के विरुद्ध चुनाव लड़ने की बात चर्चा की विषय बनी हुई थी. इसलिए कि कन्हैया चौबे की पहचान भवनाथपुर इलाके में भाजपा के अतिअनुशासित व समर्पित सिपाही के रूप में बनी हुई थी. श्री चौबे भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए काफी जी-जान से जुटे हुए थे. लेकिन अंतिम समय भाजपा का टिकट भवनाथपुर के कांग्रेस विधायक अनंत प्रताप देव को मिलने की घोषणा होते ही वे आग-बबूला हो गये और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक कर अलग पार्टी बनाते हुए बागी प्रत्याशी बनने का निर्णय लिया और नामांकन भी कर दिया. श्री देव ने भाजपा की टिकट मिलने के साथ ही अपने क्षेत्र में लौटने के बाद सबसे पहले वे कन्हैया चौबे के घर पहुंच कर उन्हें मनाने का प्रयास किये. लेकिन आक्रोशित चौबे श्री देव को खरी-खोटी सुनाते हुए वापस कर दिये. इस बीच जिला से लेकर प्रदेश तक के अनेक नेताओं ने फोन कर श्री चौबे को मनाने का प्रयास किया. लेकिन न सिर्फ वे उनकी बातों को अनसुनी किये, बल्कि उन्हें काफी कुछ कह कर अपना भड़ास भी निकाली. यहां तक श्री चौबे को मनाने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सौदान सिंह भी विशेष रूप से यहां पहुंचे. लेकिन बात तब भी नहीं बनी. श्री चौबे ने मोबाइल से बात करने से ही इनकार कर दिया. अंतत: रविवार की रात जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने श्री चौबे को फोन किया, तब जाकर उनका मन बदला और उन्होंने बागी प्रत्याशी से अपना नाम वापस लेने का फैसला लिया. नामांकन के अंतिम दिन न सिर्फ भवनाथपुर क्षेत्र में, बल्कि पूरे झारखंड में कन्हैया चौबे के निर्णय के विषय में राजनीतिज्ञ नजर गड़ाये हुए थे.
...और मान गये कन्हैया चौबे
राष्ट्रीय अध्यक्ष के फोन आने के बाद मन बदलाप्रतिनिधि, गढ़वा. भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे कन्हैया चौबे अंतत: मान गये और नामांकन के अंतिम दिन उन्होंने नाम वापस ले लिया. लेकिन इस बीच नामांकन के दो दिन पूर्व से नामांकन के अंतिम दिन तक भवनाथपुर इलाके […]
