छतीसगढ़ के रायपुर पुलिस ने पुछताछ के बाद सीडब्ल्यूसी गढ़वा के माध्यम से अभिभावकों को सौंपा धुरकी के खुुटिया मदरसे के हैं 11 बच्चे, दो बच्चे बलरामपुर व एक सोनभद्र का पीयूष तिवारी गढ़वा . गढ़वा के धुरकी क्षेत्र से जुड़े एक संवेदनशील मामला सामने आया है. इसमें मदरसा शिक्षक अब्दुल रसीद 14 नाबालिग बच्चों को कुरान की उच्च शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के कोरबा ले जा रहे थे. बच्चों में 11 गढ़वा के, 2 बलरामपुर (छत्तीसगढ़) के और 1 सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) का था. यात्रा के दौरान रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन को संदेह हुआ क्योंकि बच्चों के साथ कोई अभिभावक नहीं था और पूछताछ में संतोषजनक उत्तर नहीं मिले. इसके बाद सभी बच्चों को रायपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया और शिक्षक को हिरासत में लिया गया. बच्चों को उनके-अपने अभिभावकों को सौंप दिया गया. करीब 15 दिनों तक बच्चों को रायपुर के बालगृह में रखा गया और शिक्षक से गहन पूछताछ की गयी. बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चों को उनके-अपने अभिभावकों को सौंप दिया गया. गढ़वा के 11 बच्चों को स्थानीय सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) ने माता-पिता को बुलाकर सौंपा और शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि उनका नामांकन सरकारी विद्यालयों में कराया जाये. शेष तीन बच्चों को उनके गृह राज्यों में सीडब्ल्यूसी के माध्यम से अभिभावकों को सौंपा गया. सीडब्ल्यूसी गढ़वा के पदाधिकारियों ने बताया कि बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच है. सभी को सुरक्षित रूप से अभिभावकों तक पहुंचा दिया गया है. इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि आगे उनकी पढ़ाई बाधित न हो और उन्हें औपचारिक शिक्षा से जोड़ा जाये. इसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं है : अब्दुल दूसरी ओर, शिक्षक अब्दुल रसीद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे पहली बार बच्चों को कोरबा के मदरसे में ले जा रहे थे. बच्चे पहले से ही गांव के मदरसे में पढ़ते आ रहे थे और इसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं है. उनका कहना था कि उद्देश्य केवल कुरान की उच्च शिक्षा दिलाना था.
...कुरान की उच्च शिक्षा दिलाने कोरबा जा रहे 14 बच्चे व मदरसा शिक्षक हिरासत में, पूछताछ के बाद भेजा गया घर
गढ़वा के धुरकी क्षेत्र से जुड़े एक संवेदनशील मामला सामने आया है.
