सड़क विहीन है मिरचइयां गांव का बिचला टोला

धुरकी : धुरकी प्रखंड के मिरचइआ गांव के बिचला टोला तक आजतक सड़क नहीं बन पाने से वहां के लोगों को आये दिन इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. करीब दो किमी तक फैले इस टोले में दलित परिवार के लगभग 100 घरों को मिलाकर करीब 1000 की आबादी है. इस टोले तक […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

धुरकी : धुरकी प्रखंड के मिरचइआ गांव के बिचला टोला तक आजतक सड़क नहीं बन पाने से वहां के लोगों को आये दिन इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. करीब दो किमी तक फैले इस टोले में दलित परिवार के लगभग 100 घरों को मिलाकर करीब 1000 की आबादी है. इस टोले तक विकास के नाम पर बिजली का तार तो पहुंच गया है, लेकिन सड़क व पानी की समस्या से इस टोले के लोग आज भी जूझ रहे हैं. गांव के मुख्य पथ से इस टोले पर जाने के लिए कोई सड़क नहीं है. बरसात के दिनों में इस टोले तक कोई बाइक से भी नहीं जा पाता है.

जैसे-तैसे पगडंडी के सहारे ग्रामीण अपने घर तक पहुंचते हैं. इस टोले के हरिहर भुइयां, मगरू भुइयां, सुनील भुइयां, सोभनाथ भुइयां, बासंती देवी, शांति देवी, संगीत देवी, पार्वती देवी, सुनरी देवी आदि ने बताया कि वे लोग कई बार पंचायत की आम सभा में सड़क बनाने को लेकर आवेदन दिया है, लेकिन कभी भी कोई उन लोगों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों का कहना है कि इस टोले के वे सभी लोग गरीब-मजदूर वर्ग के हैं. सक्षम होते, तो चंदा लगाकर सड़क का निर्माण कर दिये होते.
सड़क नहीं रहने के कारण सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब रात में यहां किसी की बीमारी बढ़ती है या फिर किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है. उस समय डोली-खटोली ही एक मात्र सहारा बच जाता है. दो किलोमीटर चलकर गांव के मुख्य पथ पर जाना पड़ता है. इसके बाद कोई वाहन का उपयोग हो पाता है. पिछले वर्ष विफन भुइयां की पुत्री को प्रसव पीड़ा के बाद समय पर साधन नहीं बन पाने के कारण महिला ने घर में ही दम तोड़ देना पड़ा था और तो और बरसात के दिनों में इस टोले के करीब 100 बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते हैं.
सिर्फ वही बच्चे विद्यालय जाते हैं, जिसके अभिभावक खुद बच्चे को विद्यालय छोड़ने जाते हैं. बच्चे को ले जाने में परेशानी इसलिए होती है कि टोले से विद्यालय की दूरी दो किलोमीटर है, जहां जाने के दौरान सुगम सड़क नहीं होने के साथ रास्ते में झाड़ी लगी रहती है. इस टोले के लोगों को शादी करने में भी परेशानी हो रही है. इसलिए कि बरात को दरवाजे तक नहीं पहुंच पाने की बात कहकर लड़के वाले शादी से इनकार कर देते हैं.
वे दरवाजे तक पैदल चलकर जाने को तैयार नहीं हैं. ग्रामीणों के मुताबिक इसके कारण इस टोले के सुदामा भुइयां, सुबास भुइयां, सत्येंद्र भुइयां, नंदलाल भुइयां, रजवंती कुमारी का यह कहकर शादी नहीं हो पायी है. उनके देखने के बाद लोग यहां लौटकर यहकर शादी से इनकार कर दिये कि दरवाजे तक बरात ले जाने के लिए रास्ता नहीं है, इसलिए वे शादी नहीं कर सकते. इसी तरह ग्रामीणों ने पानी की समस्या भी बतायी.
उन्होंने कहा कि 1000 की आबादी पर तीन चापाकल लगाये गये थे. लेकिन इसमें दो ही ठीक है. लेकिन गर्मी के दिनों में सभी चापाकल सूख जाते हैं. इसके कारण ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ता है. यहां तक कि बरसात के दिनों में भी कुएं का गंदा पानी पड़ता है. एक बार इस टोले पर डायरिया फैल गया था. इसमें आधा दर्जन बच्चे की मौत हो गयी थी. इसके बाद उसी साल मुखिया ने एक चापाकल लगाया था.
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