किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं देने की दी चेतावनी
रमकंडा : रमकंडा प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर हरहे पंचायत आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. एक तरफ जहां पंचायत आज भी सड़कविहीन है, तो दूसरी तरफ पानी की समस्या से भी पंचायत के ग्रामीण जूझ रहे हैं. गर्मी के मौसम शुरू होते ही सारा चापाकल सूखने लगा है.
हरहे गांव के ग्रामीणों को पानी के लिए दो किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है. ग्रामीण बताते हैं कि पंचायत के कुट्टी, हरहे, चपरी, कसमार गांव के हजारों ग्रामीण कच्ची सड़कों पर आवागमन करने पर मजबूर हैं.
पंचायत को प्रखंड मुख्यालय से जोड़नेवाला सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. जिसपर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. इसके साथ ही अनुमंडल मुख्यालय पहुंचने के लिए उन्हें 14 किमी की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है. ग्रामीणों ने कहा कि प्रखंड के अन्य पंचायतों में पक्की सड़कों का निर्माण कराया गया. लेकिन आज तक हरहे पंचायत के किसी भी गांव में पक्की सड़कों का निर्माण नहीं किया गया. बताया कि 10 वर्ष पहले पंचायत के कुछ गांवों में मिट्टी-मोरम पथ का निर्माण कराया गया था. वह अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. उसपर पैदल चलना भी मुश्किल है.
ग्रामीण नागेश्वर साव, कन्हाई साव, निरंजन सिंह, त्रिपाल सिंह, शिवनंदन साव, शम्भू चौधरी, गिरिजालाल सिंह, बीरबल सिंह, प्रयाग मिस्त्री, जयकरण सिंह, कुसकुमार सिंह, अर्जुन सिंह, कामेश्वर साव, अनिरुद्ध सिंह, झमन सिंह, कंग्रेस सिंह, सुनील प्रसाद, रामायण साव, जगरनाथ सिंह, गिरजा साव, बिनोद भुईयां, आदित्य प्रसाद, छविनाथ सिंह, टूटाई ठाकुर, सरोज देवी, ओमप्रकाश साव, पनपती देवी, सोभागी देवी, ललिता देवी, किसमाती देवी, दुलारी देवी, रुक्मणि देवी, कलावती देवी, अंजू देवी, जशोदा देवी, कवलपाती देवी, कलावती कुँवर, रजनी देवी, बरती देवी आदि ने बताया कि पंचायत के शिशवा मोड़ से कुट्टी एवं चटकमान से चपरी तक सड़क निर्माण को लेकर दर्जनों बार मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत किया गया. लेकिन आज तक सड़कों की स्थिति जानने कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा.
सड़क मामले को लेकर प्रखंड स्तरीय अधिकारियों सहित जिला मुख्यालय में भी शिकायत की गयी, लेकिन लोकसभा चुनाव के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी सड़कों की स्थिति में सुधार होने की बजाय और बदतर हो गयी. ग्रामीण बताते हैं कि चुनाव के समय सांसद-विधायक गांव में पहुंचकर विकास का आश्वासन देते हैं.
लेकिन चुनाव खत्म होते ही पंचायत के मुद्दों को गौण कर देते हैं. उन्होंने एक स्वर में कहा कि पंचायत का विकास नहीं होने से इस बार के चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को मत नहीं दिया जायेगा. ग्रामीणों ने कहा कि आजादी के बाद से लेकर आजतक बार-बार मतदान करने के बाद भी वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. प्रखंड के अन्य क्षेत्रों में विकास कार्य हुआ है. लेकिन हरहे पंचायत आज भी सड़क विहीन है.
ग्रामीणों ने कहा कि हरहे गांव के हाठु नदी पर पुल निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली थी. लेकिन कागजों पर ही पुल का निर्माण कार्य हो गया. नदी पर पुल नहीं बनने से उन्हें अधिक दूरी तय कर अनुमंडल व जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है. मुखिया श्रवण प्रसाद कमलापुरी ने बताया कि कुट्टी व चपरी गांव को पंचायत मुख्यालय से जोड़ने के लिये रैयती जमीन को राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री कराया गया. लेकिन सरकार की अनदेखी की वजह से पंचायत में सड़क नहीं बन सकी.
