टिकट को लेकर प्रत्याशियों की परिक्रमा तेज

प्रमुख दलों के पास अध्यक्ष पद के उम्मीदवार चुनने को लेकर चुनौती बढ़ी विनोद पाठक गढ़वा : गढ़वा नगर परिषद के चुनाव की निकटता को लेकर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के बीच अभी से सरगर्मी बढ़ गयी है. इस बार का चुनाव दलगत आधार पर होने के कारण अध्यक्ष व उपाध्यक्ष […]

प्रमुख दलों के पास अध्यक्ष पद के उम्मीदवार चुनने को लेकर चुनौती बढ़ी
विनोद पाठक
गढ़वा : गढ़वा नगर परिषद के चुनाव की निकटता को लेकर अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के बीच अभी से सरगर्मी बढ़ गयी है. इस बार का चुनाव दलगत आधार पर होने के कारण अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के दावेदारों की स्थिति कठिन हो गयी है.
नगर निकाय के चुनाव दलीय आधार पर किये जाने की घोषणा जैसे ही हुई, इसके दावेदारों के चेहरे फीके पड़ते दिखे. इसके बाद से ही प्रबल दावेदार संबंधित दल से अपना टिकट पाने के लिए बेचैन दिख रहे हैं. लोगों को काफी उम्मीद थी कि दो बार महिला पिछड़ा के लिए आरक्षित रहने के बाद इस बार का अध्यक्ष का पद सामान्य सीट हो जायेगा. लेकिन पिछड़ा से सामान्य तो जरूर हुआ, लेकिन साथ ही पुन: महिला के आरक्षित हो जाने से वैसे लोग पूरी तरह से निराश हो गये.
इसके बाद कई चेहरे जो सामने आ रहे थे, उनको वापस होना पड़ा है. बावजूद इसमें से अधिकांश चेहरे अपनी पत्नी को आगे कर नेपथ्य से अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए सक्रिय हैं.
लेकिन उन्हें इसके लिए अब अपने दल से टिकट की जुगाड़ करनी पड़ रही है. यहां एक दल के पास ठीक विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह कई उम्मीदवारों की लाइन लगी हुई है. इसके कारण एक तरफ उम्मीदवारों के पास जहां परेशानी है, वहीं दल के लिए भी संगठन की एकजुटता बचाये रखते हुए अपने उम्मीदवार का चयन करना कम चुनौती नहीं है. यहां प्रमुख दलों में भाजपा, राजद और झामुमो है, जो विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे को टक्कर देने की स्थिति में होते हैं.
इसके अलावा कांग्रेस, बसपा, आजसू, भाकपा माले, सपा जैसी अन्य पार्टियां भी अपना उम्मीदवार दे सकती हैं. लेकिन बहरहाल नगर परिषद के प्रमुख पद अध्यक्ष के लिये टिकट पाने की मारा-मारी जो बनी हुई है, उनमें भाजपा, राजद और झामुमो पार्टी प्रमुख रूप से शामिल है.
इन पार्टियों में सिर्फ उम्मीदवारों के बीच टिकट पाने को लेकर प्रतिद्वंद्विता नहीं है, बल्कि इससे कहीं अधिक नेताओं के बीच प्रतिद्वंद्विता है. इसमें सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा के नेता यहां कई गुटों में विभाजित है. सभी गुट अपने पसंद के उम्मीदवार बनाने के लिए पहल करेंगे. एक तो यहां सीटिंग विधायक और नगर परिषद के सीटिंग अध्यक्ष भी हैं. लेकिन इसके अलावा कई कारक हैं, जिसको आधार बनाकर यहां से आनेवाले जनप्रतिनिधि अन्य उम्मीदवारों के लिए भी अपना प्रयास कर सकते हैं. ऐसे में पार्टी को नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना आसान नहीं है. राजद और झामुमो से भी अध्यक्ष की टिकट पाने के लिये होड़ है. राजद के यहां पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह और झामुमो से केंद्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर विधानसभा में भाजपा के निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे हैं.
ये सभी दल नगर परिषद के चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल के रूप में देख रहे हैं. निश्चित रूप से विधानसभा चुनाव के करीब तीन साल में मतदाताओं के मूड का पता नगर परिषद के चुनाव में चलेगा. इससे ये दोनों नेता उम्मीदवारों का चयन निश्चित रूप से काफी सोच समझकर ही करेंगे. इन दलों के पास भी अपने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करते हुए दल की एकजुटता बचाते हुए ही उम्मीदवार का चयन करना कम चुनौती नहीं होगा. इनके पास कई ऐसे प्रत्याशी भी लाइन में हैं, जो दो नाव पर अपना पैर जमाये हुए हैं. वैसे प्रत्याशी भाजपा से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में इन दलों से टिकट पाने की जुगत भिड़ायेंगे. यहां उपाध्यक्ष पद को लेकर अध्यक्ष जैसी होड़ तो नहीं दिख रही है. लेकिन बावजूद उपाध्यक्ष पद के लिए पार्टी से टिकट पाने के लिए कई नाम हैं.
ऐसे में नगर परिषद चुनाव में मैदान में उतरने को लेकर टिकट पाने की दावेदारी से पार्टी नेताओं के पास परिक्रमा करनेवाली की भीड़ हो गयी है. टिकट के दावेदार गढ़वा से लेकर रांची तक अपनी टिकट सुनिश्चित करने को लेकर दौड़ लगाते दिख रहे हैं.

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