अरविंद का ख़ात्मा मेरा संकल्प : एसपी
गढ़वा : भाकपा माओवादी का शरणस्थली गढ़वा जिले के भंडरिया थाना क्षेत्र का बूढ़ा पहाड़ को एक बार फिर नक्सलियों से मुक्त कराने को लेकर चर्चा में है़ देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विजय कुमार ने बूढ़ा पहाड़ अभियान में लगे जवानों से मिलकर उनका हौसला अफजाई किया और हर हाल में बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराने को कहा़ इस बीच उक्त क्षेत्र से नक्सलियों द्वारा ग्रामीणों को जबरन संगठन में शामिल कराने को लेकर उन्हें ले जाये जाने के बाद फिर एक बार बूढ़ा पहाड़ सुर्खियों में है तथा पुलिस के समक्ष एक बार फिर इस क्षेत्र को नक्सलियों से मुक्त कराने की चुनौती आन पड़ी है़ इसके पूर्व पुलिस के द्वारा छोटी-छोटी कई बार तथा बड़े ऑपरेशन दो बार चलायी जा चुकी है़ इस बार का यह तीसरा अभियान है जिसमें लगभग चार हजार पुलिसकर्मियों को लगाया गया है़ इनमें झारखंड पुलिस के अलावे सीआरपीएफ एवं कोबरा बटालियन भी शामिल है़
क्यों चर्चा में है बूढ़ा पहाड़ : झारखंड के पारसनाथ पहाड़ी के बाद दूसरा सबसे लंबा और ऊंचा बूढ़ा नामक पहाड़ जो गढ़वा में अवस्थित है,लगभग एक वर्ष पूर्व तक आदिवासियों के लिए हर परिस्थिति में उन्हें महफ़ूज रखने वाला उक्त पहाड़ आज उनके लिए अभिशाप बन गया है़ क्योंकि अब वह नक्सलियों के कब्जे में है़ झुमरा एवं सारंडा जैसे और कई पहाड़ों से खदेड़े जाने के बाद नक्सलियों ने बूढ़ा पहाड़ को अपना स्थायी पनाहगार बना लिया है़ तथा इसी पहाड़ से नक्सली अपने वजूद की लड़ायी लड़ रहे है़ं साथ ही इसे अपना ठिकाना बनाये हुए नक्सलियों द्वारा झारखंड,बिहार और छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सली घटनाओं को अंजाम देने की योजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है़
नौजवानों को उठा रहे नक्सली : राज्य से नक्सल उन्मूलन को ले कर सालों से चलता अभियान, सरेंडर नीति,कई ग्रुपों में बटे संगठन और ग्रामीणों के असहयोग ने माओवादियों को कमजोर कर दिया है, जिसका नतीजा है कि कभी हजारों की
संख्या वाला संगठन आज सैकड़ों में सिमट कर रह गया है,जिसका आलम है कि अपने वजूद को बचाने का संघर्ष कर रहे माओवादी अब गांव से जबरदस्ती नवजवानों को उठा रहे हैं,अभी हाल ही में छठ महापर्व से एक दिन पूर्व बूढ़ा पहाड़ के बूढ़ा और झासगोडा गांव से माओवादियों द्वारा दस नवजवानों को अपने संगठन में शामिल करने के लिए ले जाया गया है़ इसकी सूचना के बाद ही बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया है़
अरविंद और सुधाकरण है मौजूद : पहाड़ पर कोई साधारण नहीं बल्कि नक्सलियों का थिंक टैंक और उनके लिए आदर्श माना जानेवाला अरविंद पहाड़ पर मौजूद है,साथ ही उसके सहयोग के लिए आंध्रप्रदेश का कुख्यात और बम लगाने में माहिर नक्सली सुधाकरण भी अपने नक्सली पत्नी के साथ मौजूद है,आपको यहां बता दें कि अरविंद के ऊपर सरकार ने एक करोड़ का इनाम रखा है,एक बड़े सुरक्षा घेरे के बीच और तकरीबन 300 से ज्यादा नक्सलियों के साथ पहाड़ पर मौजूद अरविंद और सुधाकरण यहीं से बैठे- बैठे नक्सली गतिविधि का संचालन कर रहे है़
तीसरे अभियान के साथ नक्सलियों के चौथे का संकल्प : जबसे नक्सली पहाड़ पर काबिज हुए हैं तब से उनसे पहाड़ को मुक्त कराने के लिए पुलिस अभियान चला रही है,लेकिन अब तक सफलता हांथ नहीं लगी है,कारण की नक्सलियों द्वारा पहाड़ की तलहटी से ले कर चारो तरफ कहीं लैंड माइंस तो कहीं प्रेशर बम लगाया गया है़
इसलिए पुलिस को अपने अभियान में फूंक- फूंक कर कदम रखना पड़ रहा है़ लेकिन नक्सलियों से पहाड़ को आजाद कराने को संकल्पित पुलिस ने दो बड़े अभियान के बाद पिछले 2 नवम्बर से शुरू किया है महाअभियाऩ पुलिस का संकल्प है कि इस तीसरे महाअभियान के साथ वह नक्सलियों का चौथा करा कर ही वापस लौटेंगे़
विजय और सदन की जोड़ी करेगी नक्सलियों का मर्दन : महाअभियान से पहले बूढ़ा पहाड़ के इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हो चुके एएसपी अभियान सदन कुमार और रंका डीएसपी विजय कुमार महाअभियान में मुख्य रूप से मौजूद रह कर अभियान चला रहे है़ दोनो कहते हैं कि उनका एकमात्र ध्येय है बूढ़ा पहाड़ से नक्सलियों का पूर्ण मर्दन करना़
टोपी छड़ी हाथ आया है,समूल देह भी मैं ही लाऊंगा : एसपी अपने जाबांजी से कुछ नक्सलियों को मार गिराने और इसी अरविंद के दस्ते को उसके साथ ही भागने पर विवश करने वाले तत्कालीन गुमला डीएसपी और वर्तमान गढ़वा एसपी मोहम्मद अर्शी ने कहा कि गुमला में हुए एक मुठभेड़ में कुछ नक्सली मारे गए थे़ वहीमुठभेड़ के बाद कुख्यात नक्सली अरविंद का टोपी और छड़ी भी पाया गया़ था़ एसपी ने कहा कि यह संयोग है कि जब वे गुमला में थे तो उस वक्त वहां भी अरविंद था,आज जब वे गढ़वा में है तो यहां भी अरविंद उनके सामने है़ और इस बार उसका समूल देह हासिल करूंगा़
2017 में ही राज्य से ख़त्म होगा नक्सलवाद : राज्य स्थापना दिवस पखवारा में भाग लेने गढ़वा पहुंचे प्रभारी मंत्री सह राज्य के श्रम नियोजन मंत्री राज पालिवार ने कहा कि सरकार और पुलिस विभाग एक साथ संकल्पित है कि इसी 2017 में ही हम राज्य को नक्सलियों से मुक्त करा लेंगे़ इस निमित पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चालाया जा रहा है,जिसका नतीजा है कि नक्सली एक पॉकेट में सिमट कर रह गए है़ बहरहाल एक तरफ़ अपने वजूद की लड़ायी लड़ते नक्सली,उधर उनके समूल ख़ात्मा को ले कर महाअभियान कि शुरूआत कर चुकी पुलिस है, अब देखना यह होगा कि कब तक पुलिस बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से आजाद करा पाती है़
