1988 में सरकार ने बांटी जमीन, आज तक नहीं मिला कब्जा

मझिआंव : गढ़वा जिले के मझिआंव प्रखंड के रामपुर पंचायत के बिडंडा गांव में वर्ष 1988 में सीलिंग में जब्त जमीन भूमिहीनों को सिर्फ कागजों पर ही दे दी गयी. हकीकत में भूमिहीनों को अब तक जमीन नहीं मिल पायी है. वहीं, जमीन मिलने की आस में चार भूमिहीनों की मृत्यु भी हो चुकी है. […]

मझिआंव : गढ़वा जिले के मझिआंव प्रखंड के रामपुर पंचायत के बिडंडा गांव में वर्ष 1988 में सीलिंग में जब्त जमीन भूमिहीनों को सिर्फ कागजों पर ही दे दी गयी. हकीकत में भूमिहीनों को अब तक जमीन नहीं मिल पायी है. वहीं, जमीन मिलने की आस में चार भूमिहीनों की मृत्यु भी हो चुकी है. लेकिन 28 साल बाद भी ये भूमिहीन जमीन पाने की आस में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. गुरुवार को लाभुक भूमिहीन सीमांकन की मांग को लेकर अंचल कार्यालय पहुंचे थे.
परचा व रसीद काटी गयी : वर्ष 1988 में बिडंडा गांव में 135 भूमिहीनों को सरकार द्वारा स्थानीय जमींदार की 135 एकड़ भूमि सीलिंग में जब्त कर दी गयी है. इन भूमिहीनों के नाम से परचा व रसीद काट दी गयी, लेकिन आज तक उक्त भूमि की मापी कर सीमांकन नहीं किया गया. इस बीच इन 135 भूमिहीनों में से आसिफ शेख, मेसर राम, अलदीन खान एवं कमरू खान की मौत हो गयी.
बुधवार को अंचल कार्यालय में पहुंचे लाभुक भूमिहीनों में कुर्बान शेख, नारायन भुइयां, सूरत भुइयां, शिवपूजन भुइयां, रोशन बीबी, मनमतिया देवी, रजकलिया देवी, सकुन्ती देवी आदि ने अपना-अपना पर्चा दिखाते हुए कहा कि वे लोग 2001 से मापी कराने के लिए अंचल एवं जिला कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन भूमि की मापी नहीं की गयी. इसी बीच कुछ बिचौलिये अंचलकर्मियों की मिलीभगत से दूसरे की भूमि का नक्शा अपने नाम से कटवा कर विवाद भी खड़ा कर चुके हैं.
गलत बन चुके नक्शे को रद्द कर जल्द मापी करायी जाये : भूमिहीनों ने कहा कि अंचल कार्यालय द्वारा गलत बन चुके नक्शे को रद्द कर जल्द मापी कर भूमिहीनों को उक्त भूमि सौंप दी जाये. अगर ऐसा नहीं, तो वहां स्थिति बिगड़ने की आशंका है. भूमिहीनों ने कहा कि उपायुक्त एवं एलआर डीसी गढ़वा के पास भी वे गये थे. वहां कहा गया कि तीन जून 2017 को ही एसी के पत्रांक 2201 के द्वारा पत्र मझिआंव अंचल कार्यालय को भेज दिया गया है. लेकिन जब वे लोग यहां आये तो कहा गया कि गढ़वा से यहां कोई पत्र नहीं आया है.
आवेदन मिलने पर मापी करायी जायेगी : सीओ
इस संबंध में अंचलाधिकारी कमल किशोर सिंह ने बताया कि सभी रैयत एक आवेदन लिखकर दें, उसकी मापी अंचल अमीन से करायी जायेगी. जब सरकार ने इन लोगों को भूमि दी है, तो उसकी मापी कर सभी को अलग-अलग भूमि दी जाएगी.

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