east singhbhum news: पानी की राह देखती योजना, जंग खा रहीं उम्मीदें

घाटशिला. 110 करोड़ की जल जीवन मिशन योजना अधर में, लाखों की सामग्री बर्बाद

गालूडीह .

पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला प्रखंड के कुलियाना गांव के पास सुवर्णरेखा नदी किनारे जल जीवन मिशन योजना के तहत 110 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई पेयजल योजना बीते कई वर्षों से ठप पड़ी है. केंद्र और राज्य सरकार की सहभागिता से 2021 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य घाटशिला प्रखंड की 17 पंचायतों में घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाना था. लेकिन केंद्र सरकार की ओर से फंडिंग बंद करने के बाद यह योजना अधर में लटक गई है

सरिया में लगा जंग, सीमेंट बन गए पत्थर

जानकारी के अनुसार, योजना की शुरुआत में ठेका कंपनी ने भारी मात्रा में ट्रक व हाइवा से सीमेंट और सरिया (छड़) मंगवाया था. निर्माण कार्य बंद होने के कारण उक्त सामग्री अब बेकार हो चुकी है. सरिया नदी किनारे खुले में पड़े-पड़े जंग खा गए हैं, जबकि सीमेंट कुलियाना प्राथमिक विद्यालय के एक खिड़की रहित कमरे में वर्षों से पड़ा है. बारिश और नमी के कारण सीमेंट अब पत्थर बन चुका है.

लाखों की सामग्री बर्बाद, कोई देखने वाला नहीं

विद्यालय भवन में रखे सीमेंट की गुणवत्ता समाप्त हो चुकी है और उसके उपयोग की संभावना नहीं बची है. ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो हाइवा सीमेंट इस योजना के तहत मंगवाया गया था, जो अब पूरी तरह से बर्बाद हो गया है. जल जीवन मिशन के तहत कुलियाना में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थल पर पड़े सरिया भी जंग लगने के कारण अनुपयोगी हो चुके हैं. इससे लाखों रुपये की क्षति का अनुमान है, लेकिन प्रशासन की ओर से अबतक कोई पहल नहीं हुई है.

2021 में किया गया था स्थल चयन

जानकारी के मुताबिक, 2021 में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सहायक अभियंता आरएल झा, डीपीआर टीम व पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में बड़ाकुर्शी पंचायत के कुलियाना गांव में स्थल चयन किया गया था. महाराष्ट्र की एसआइएसपीएल कंपनी को योजना का कार्यादेश मिला था. दो एकड़ जमीन पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण प्रस्तावित था, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था.

ग्रामीणों में निराशा, पुनः योजना को शुरू करने की मांग उठी

स्थानीय लोगों में इस योजना के ठप होने से भारी निराशा है. उन्होंने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय से इस योजना को पुनः चालू करें, ताकि वर्षों से पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों को राहत मिल सके.

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Author: DEVENDRA KUMAR

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