गालूडीह.
पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल में इस बार धान के बंपर उत्पादन की उम्मीद है. धान के पौधों में बाली निकलने लगी है. जल्द ही दाना आयेगा. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अब बारिश नहीं रुकी, तो किसानों को परेशानी होगी. दारीसाई अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक डॉ एन सलाम कहते हैं, इस बार समय पर बेहतर बारिश से किसानों ने समय पर धान रोपनी की. अब बाली निकलने लगी है. अब शीत गिरने की जरूरत है. तब बालियों में दाने ज्यादा लगेंगे. अब बारिश की जरूरत नहीं होगी. मौसम साफ रहेगा, तो बेहतर होगी. चारों और धान की फसल लहलहा रही है. खेतों में लगी फसल में लगभग 40 से 50 फीसद तक बाली बाहर निकल आयी है. अब दाना भरेगा.कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे वक्त में धान को साफ मौसम की आवश्यकता होती है. ताकि धान में ओस की बूंदें भर कर चावल का दाना बन सके. अगर लगातार बारिश हुई, तो धान की फसल पर संकट उत्पन्न हो जायेगा. किसानों के मेहनत पर पानी फिर जायेगा.घाटशिला प्रखंड : 10400 हेक्टेयर में लक्ष्य था, 9083 में खेती हुई
इस वर्ष घाटशिला प्रखंड में 10400 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य था, जबकि 9083 हेक्टेयर में खेती हुई. किसानों ने बताया कि इस बार समय पर रोपनी हुई है. बीमारियां भी नहीं के बराबर हैं. जिन किसानों ने जून के अंत और जुलाई के शुरुआत में रोपनी की, उसमें अब बाली निकल रही है. लगातार बारिश होती रही, तो धान में दाना के बदले खखरी की संभावना बढ़ जायेगी. मौसम साफ रहा, तो रिकाॅर्ड उत्पादन को कोई रोक नहीं सकेगा. धान का सारा फूल एक साथ नहीं निकलता है. यह परागन में सात दिनों का वक्त लेता है. परागन के दौरान सात दिन लगातार बारिश होने पर धान फसल खराब होगी.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
