मुसाबनी. केंद्र सरकार ने खदानों में काम करने वाले मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोतरी की है. इससे श्रमिकों में खुशी की लहर है. इसका सीधा लाभ सुरदा माइंस समेत क्षेत्र की अन्य खदानों में कार्यरत हजारों मजदूरों को मिलेगा. सुरदा माइंस का संचालन कर रही ठेका कंपनी आरके अर्थ प्राइवेट लिमिटेड ने कार्यस्थल पर नोटिस चस्पा कर नयी दरों की आधिकारिक जानकारी साझा की है.
सरफेस और अंडरग्राउंड मजदूरों के लिए अलग-अलग दर:
नयी मजदूरी दर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गयी है. सरफेस (सतह) पर काम करने वाले अकुशल मजदूरों को अब प्रतिदिन 556 रुपये, अर्ध कुशल को 693 रुपये, कुशल को 827 रुपये और उच्च कुशल मजदूरों को 964 रुपये मिलेंगे. वहीं, जोखिम भरे अंडरग्राउंड (भूमिगत) कार्यों के लिए मजदूरी दर अधिक रखी गयी है. अंडरग्राउंड अकुशल मजदूरों को 693 रुपये, अर्ध कुशल को 827 रुपये, कुशल को 964 रुपये और उच्च कुशल श्रमिकों को 1078 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित की गयी है. महंगाई के दौर में मजदूरी में की गयी यह वृद्धि माइंस कर्मियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है. ठेका कंपनी द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद मजदूरों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. जानकारों का कहना है कि मजदूरी की नयी दर लागू होने से न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा.ठेका कंपनी लक्ष्य से दूर, उत्पादन बढ़ाने की चुनौती
मुसाबनी. एचसीएल की सुरदा खदान का संचालन करने वाली ठेका कंपनी आरके अर्थ रिसोर्स के समक्ष निर्धारित उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करना बड़ी चुनौती है. ग्लोबल टेंडर के माध्यम से 5 फरवरी, 2025 को जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी को अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी है. हालांकि, शुरुआती माह के 2 हजार टन के मुकाबले मार्च 2026 में उत्पादन बढ़कर 21 हजार टन तक पहुंच गया है, लेकिन यह अभी भी निविदा की शर्तों के अनुसार तय 26,400 टन के मासिक लक्ष्य से करीब 5 हजार टन कम है.ठेका कंपनी पर भारी पेनल्टी का खतरा:
लक्ष्य पूरा नहीं होने की स्थिति में ठेका कंपनी पर भारी पेनल्टी की तलवार लटक रही है. जानकारों का मानना है कि यदि पेनल्टी लगती है, तो कंपनी के लिए माइंस का संचालन मुश्किल हो जायेगा और वह इससे पीछे भी हट सकती है. ऐसा होने पर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि वर्तमान में कंपनी प्रतिमाह 2.4 करोड़ रुपये वेतन मद में खर्च कर रही है.पुरानी मशीनें और समन्वय की कमी बनी बाधा:
उत्पादन लक्ष्य के मार्ग में पुरानी मशीनरी और माइंस के भीतर नयी मशीनों को स्थापित करना एक बड़ी तकनीकी बाधा है. इसके अलावा, प्रबंधन और मजदूरों के बीच समन्वय का अभाव भी एक प्रमुख कारण है.ठेका कंपनी ने रात्रि पाली में ब्लास्टिंग और रोटेशन आधारित अवकाश जैसी योजनाएं लागू कर 365 दिन उत्पादन का प्रयास किया, लेकिन इसमें मजदूरों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका है.
खदान में 995 मजदूर व 100 अधिकारी कार्यरत
वर्तमान में सुरदा माइंस में 995 मजदूर और 100 अधिकारियों को रोजगार मिला हुआ है. माइनिंग डेवलपमेंट का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने के लिए एचसीएल प्रबंधन, ठेका कंपनी और मजदूरों के बीच लचीलेपन और बेहतर संवाद की आवश्यकता है. यदि तीनों पक्ष सकारात्मक सोच के साथ मिलकर काम करें, तभी लक्ष्य प्राप्ति और क्षेत्र का आर्थिक भविष्य सुरक्षित हो पाना संभव है.
