East Singhbhum News : बीसीओ पर 2.25 लाख की गड़बड़ी का आरोप, कर्मचारी हुआ कार्यमुक्त

बीसीओ पर 2.25 लाख की गड़बड़ी का आरोप, कर्मचारी हुआ कार्यमुक्त

घाटशिला. घाटशिला लैंपस में आंतरिक विवाद और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हलचल है. लैंपस के एक कर्मचारी शंकर तंतुबाई को 31 मई, 2025 से सेवा से मुक्त कर दिया गया है. वहीं, बीसीओ जितेंद्र कुमार भगत पर दो लाख 25 हजार रुपये की गड़बड़ी का आरोप तपन मार्डी ने लगाया है. लैंपस प्रबंधन समिति से जारी पत्र के अनुसार, शंकर की कार्यशैली से लैंपस के समस्त कर्मचारी असंतुष्ट थे. समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उनकी कार्य प्रणाली समिति की सामूहिक भावना और आदर्शों के अनुकूल नहीं थी. इसके अतिरिक्त श्री तंतुबाई पर संस्था के दो लाख 25 हजार रुपये के गबन में संलिप्त होने का आरोप है. इस निर्णय पर समिति के सदस्य योगेन किस्कू, लालमोहन, सुजीत टुडू, शरद टुडू, सीता हेंब्रम, बास्तो टुडू, मायनों हांसदा, जोबा रानी भगत ने हस्ताक्षर किया. प्रबंधन समिति ने यह स्पष्ट किया है कि 31 मई 2025 के बाद शंकर तंतुबाई को लैंपस की ओर से किसी प्रकार का मानदेय या कार्य स्वीकृति नहीं दी जायेगी.

दस्तावेज मांगने पर झूठा आरोप लगाया : बीसीओ:

बीसीओ जितेंद्र भगत ने आरोपों पर कहा कि लैंपस से संबंधित दस्तावेज की मांग करने पर कुछ लोग अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं. मामले को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं. जो पैसे की लूट या गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं, उन्होंने अपने बेटे व परिवार के नाम से लैंपस का पैसा कैसे दिया. इस मामले की जांच चल रही है. जानकारी जिला सहकारिता पदाधिकारी को दी गयी है.

2016 से 2024 तक के कागजात मांगे गये:

बीसीओ कार्यालय के पत्रांक 125 के अनुसार, लैंपस से वर्ष 2016-17 से 2023-24 तक के विभिन्न पंजी जैसे अमानत पंजी, रोकड़ पंजी, सभा पंजी, धान अधिप्राप्ति पंजी, जमावृद्धि योजना के लेजर (संख्या 20, 22, 24, 31, 32, 35, 40 एवं 42) तथा अंकेक्षण प्रतिवेदन तीन कार्य दिवसों के भीतर संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.

दोनों पक्षों से बात की जायेगी :

जिला सहकारिता पदाधिकारीजिला सहकारिता पदाधिकारी आशा टोप्पो ने बताया कि जितेंद्र भगत पर लगाये गये आरोपों की जानकारी है. सहकारिता समिति ने उन्हें सूचना दी है. मामले की जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि जांच में दोनों पक्ष बीसीओ जितेंद्र भगत और सहकारिता समिति से बात की जायेगी. मामला आपसी स्तर पर नहीं सुलझता है, तो जिला सहकारिता समिति कानूनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है.

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Author: ATUL PATHAK

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