प्रतिनिधि, डुमरिया डुमरिया प्रखंड की विडंबना देखिये यहां के मॉडल स्कूल भवन 2015 से अधूरा पड़ा है और उसे पूरा करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई और मॉडल विद्यालय का अधूरा भवन अब खंडहर बन गया है. मॉडल विद्यालय का कोई ठिकाना नहीं पर अब ठिक उसके बगल में ही 2 करोड 67 लाख 85 हजार की लागत से झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद रांची के तहत छात्रावास निर्माण कार्य शुरू हो गया है. यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ. डुमरिया में मॉडल स्कूल की स्थापना 2011में हुई. इसकी शुरूआत अष्टकोशी प्लस टू उच्च विद्यालय भालुकपातडा परिसर में हुई और आज भी उसी विद्यालय के तीन पुराने कमरों में विद्यालय चल रहा है. 15 मई 2015 में डुमरिया के बारेडीह गांव में इसके नये भवन के लिए शिलान्यास किया गया. लेकिन भवन आज भी अधूरा है. विद्यालय भवन को पूरा करने की दिशा में पहल होनी थी, लेकिन आश्चर्य जनक ढंग से विद्यालय भवन के पास छात्रावास का निर्माण हो रहा है. जब विद्यालय ही अधूरा है, तो छात्रावास का औचित्य क्या है. छात्रावास बनकर तैयार भी हो जाता है तो उसमें रहेगा कौन. वह भी विद्यालय की तरह धीरे-धीरे खंडहर बन जायेगा. झारखंड का यह पहला विद्यालय होगा जहां विद्यालय भवन नहीं हैं लेकिन उस विद्यालय के लिए छात्रावास बनाया जा रहा है. जबकि यह विद्यालय गैर आवासीय है. हालांकि सुदूर क्षेत्र के मॉडल विद्यालयों में छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए कुछ मॉडल विद्यालयों में छात्रावास का प्रावधान किया जा रहा है.
डुमरिया में मॉडल स्कूल भवन बिना खुले बन गया खंडहर, अब उसके बगल में रह रहा 2.67 करोड़ का छात्रावास

खंडहर बना मॉडल स्कूल भवन. | Prabhat Khabar Network
Copied link
डुमरिया में मॉडल स्कूल का भवन 2015 से अधूरा और खंडहर बना है, लेकिन उसके बगल में ही करोड़ों की लागत से छात्रावास का निर्माण कार्य शुरू हो गया है.