चाकुलिया : फरारी के बाद पुलिस फोगड़ा की तलाश में जुटी है, परंतु अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है. इस बात की संभावना है कि फरार फोगड़ा मुंडा के रास्ते नक्सली संगठन तक ही पहुंचेंगे, क्योंकि नक्सली संगठन में ही उसे सुरक्षा मिल सकती है.
पुलिस भी मानती है कि फोगड़ा मुंडा किसी नक्सली दस्ते की शरण में पहुंच गया है. फोगड़ा मुंडा अगर संगठन में शामिल हुआ तो पुलिस को उसे पकड़ पाना आसान नहीं होगा, मगर एक सवाल खड़ा है कि क्या नक्सली संगठन फोगड़ा को अपनायेगा. अगर अपना भी लिया, तो क्या संगठन उसे बदले की कार्रवाई के तहत निदरेष ग्रामीणों की हत्या करने का इजाजत देगा. ज्ञात हो कि जामुआ मे एक वृद्धा की हत्या करने के कारण ही उसे संगठन ने बाहर का रास्ता दिखाया था.
विदित हो कि नक्सली प्रमुख किशन जी की हत्या के बाद से संगठन बैकफूट पर है. संगठन ने अपने नीति-सिद्धांतों में काफी बदलाव किया है. घाटशिला अनुमंडल में संगठन ने हिंसा नीति से खुद को दूर रखा है. पिछले दो साल में नक्सलियों द्वारा किसी ग्रामीण की हत्या करने या फिर मारपीट करने की खबर प्रकाश में नहीं आयी है. सूत्रों के मुताबिक नक्सली संगठन ने महसूस किया है कि संगठन द्वारा ग्रामीणों की हत्या के कारण संगठन को बड़ा नुकसान हुआ है. यही कारण है कि संगठन के लोग हिंसा से परहेज करते हुए ग्रामीणों को संगठन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में अगर फोगड़ा मुंडा को संगठन ने अपना भी लिया, तो क्या उसे निदरेष ग्रामीणों के खून से खूनी खेल करने का इजाजत देगा? अगर फोगड़ा मुंडा ने संगठन में शामिल होकर हत्या का खेल खेला, तो यह संगठन के लिए भारी पड़ सकता है. संगठन के पतन का कारण बन सकता है.
