अस्पताल तो है लेकिन डॉक्टर नहीं

बहरागोड़ा : राज्य के पहले स्वास्थ्य मंत्री सह चुके बहरागोड़ा के पूर्व विधायक डॉ दिनेश षाड़ंगी बहरागोड़ा प्रखंड के पैतृक गांव गंधानाटा में विकास का एक नया मॉडल दिखायी देता है. कई आलीशान भवन तो बन गये हैं. मगर सभी सफेद हाथी बने हैं. इस गांव में बने अस्पताल में डॉक्टर नहीं है, हाई स्कूल […]

बहरागोड़ा : राज्य के पहले स्वास्थ्य मंत्री सह चुके बहरागोड़ा के पूर्व विधायक डॉ दिनेश षाड़ंगी बहरागोड़ा प्रखंड के पैतृक गांव गंधानाटा में विकास का एक नया मॉडल दिखायी देता है. कई आलीशान भवन तो बन गये हैं. मगर सभी सफेद हाथी बने हैं.

इस गांव में बने अस्पताल में डॉक्टर नहीं है, हाई स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है, छात्रावास में एक छात्र नहीं है और वन विभाग द्वारा निर्मित जल मीनार में पानी नहीं है. आम जनता इन आलीशान भवनों को देख ही संतोष करती है.

आयुव्रेद अस्पताल

वर्ष 2004 में कई लाख की लागत से आयुव्रेदिक चिकित्सालय बना.मगर इसमें चिकित्सक नहीं है.अस्पताल भवन झाड़ियों से घिर गया है. खिड़िकियों के शीशे टूट चुके हैं और सामान गायब हैं.

प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र

आयुव्रेदिक अस्पताल के करीब ही कई लाख की लागत से वर्ष 2009 में प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन बना. यह भवन झाड़ियों से घिर गया है और टूट रहा है. इस केंद्र में कोई चिकित्सक या फिर नर्स नहीं है. भवन का ताला कभी खुलता नहीं है.

65 लाख का छात्रावास

राज्य संपोषित गंधानाटा हाई स्कूल का भव्य भवन है. परंतु एक भी शिक्षक नहीं है. स्कूल के पास ही वर्ष 2004 में लगभग 65 लाख की लागत से 100 शैय्या वाला आदिवासी छात्रावास बना था.आज स्थिति यह है छात्रावास में कोई छात्र नहीं रहता है. छात्रावास के सामानों की चोरी हो रही है.

जल मीनार भी बेकार

अस्पताल भवनों के पास ही वन विभाग ने विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत जल मीनार बनवा कर गांव में जालूपूर्ति शुरू की थी. यह योजना भी कई साल से बेकार पड़ी है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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