प्री-मैच्योर्ड बेबीज के लिए जरूरी है कंगारू मदर केयर यूनिट
समय पूर्व जन्मे बच्चों के समुचित विकास में बनेगा मददगार
आगामी जुलाई माह तक काम करना शुरू करने की उम्मीद
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला कुपोषण के लिए राज्य समेत पूरे देश में जाना जाता है. केंद्रीय नीति आयोग द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर 2018 में कराये गए एक सर्वे के अनुसार जिले में जन्म के बाद बच्चों का समुचित ग्रोथ नहीं हो पा रहा है. इसका मुख्य कारण जन्म से पूर्व मां व प्रसव के बाद बच्चे को उचित पोषाहार नहीं मिलना है.
इसके मद्देनजर जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में जल्द ही प्री-मैच्योर्ड एवं कुपोषित बच्चों को बचाने के लिए कंगारू मदर केयर यूनिट (केएमसीयू) शुरू की जा रही है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत सदर अस्पताल में 8 बेड का कंगारू मदर केयर यूनिट स्थापित किया जायेगा. इसके लिए मदर केयर यूनिट में विजायेंगी, जिन पर बैठ माताएं अपने नवजात शिशुओं को दुलार की गर्माहट दे सकेंगी. उक्त योजना आगामी जुलाई तक धरातल पर उतारने की संभावना है.
25 से 28 डिग्री तापमान में शिशु करेंगे स्तनपान : सदर अस्पताल में स्थापित होने वाले कंगारू केयर यूनिट में नवजात शिशु के उपचार के लिए वार्मर, फोटोथेरेपी, पल्स ऑक्सीमीटर, इन्फ्यूजन पंप सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी. वहीं विशेष प्रकार की कुर्सी में लेटी मां स्तनपान कराने के दौरान शिशु को अपनी छाती से चिपका धड़कनों का अहसास भी कराती रहेगी. ऐसे में केएमसीयू के भीतर का तापमान औसत 25 से 28 डिग्री तक रखा जायेगा, ताकि शिशु का वजन इंक्यूबेटर से भी अधिक तेजी से बढ़ सके.
पूर्व में भी होती थी माताओं की काउंसलिंग : सदर अस्पताल स्थापित एसएनसीयू में पूर्व में भी गर्भवती महिलाओं की प्रसव के बाद काउंसलिंग की जाती थी. इसके लिए एसएनसीयू में ही कंगारू मदर केयर का एक बेड स्थापित किया गया था, लेकिन उक्त योजना के साथ ही वृहत् पैमाने पर इस कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा.
