दुमका : दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बांकीजोर, बांसपहाड़ी और हीरापुर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न गांवों के ग्रामीण, रैयत एवं किसान मंगलवार से कल्याणपुर मैदान के समीप कोल टेस्टिंग बोरिंग कार्य के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गये. भाकपा माले के झंडे-बैनर तले ग्रामीणों ने बोरिंग स्थल पर ही शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना शुरू किया.
प्रशासन ने मशीनें हटायीं
आंदोलन के बीच प्रशासन ने बोरिंग स्थल से मशीनें और अन्य सामान हटाने की कार्रवाई शुरू की. आंदोलनकारियों के अनुसार, मंगलवार की रात करीब डेढ़ बजे प्रशासन ने एक बोरिंग मशीन समेत कुछ सामान वहां से हटवा दिया था. बुधवार को प्रशासन की मौजूदगी में दोपहर करीब दो बजे मजदूरों ने एक अन्य बोरिंग मशीन को खोलकर वहां से हटा लिया. आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने शेष मशीन और सामान को भी हटाने की बात कही थी.
मांगों को लेकर नारेबाजी
धरना के दौरान ग्रामीणों ने कोल टेस्टिंग बोरिंग कार्य तत्काल बंद करने, पेसा कानून का पालन सुनिश्चित करने तथा संबंधित कंपनी को क्षेत्र से वापस भेजने की मांग को लेकर नारेबाजी की. आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठायी.
बिना ग्रामसभा अनुमति बोरिंग का आरोप
धरना को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला संयोजक सह राज्य कमेटी सदस्य भुण्डा बास्की, पलटन हांसदा एवं सुभाषचंद्र मंडल ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पिछले नौ-दस महीने से बिना ग्रामसभा की अनुमति के जबरन कोल टेस्टिंग बोरिंग का काम कराया जा रहा था. उन्होंने कहा कि भाकपा माले एवं आदिवासी संघर्ष मोर्चा के आंदोलन के कारण आखिरकार प्रशासन को बोरिंग मशीनें हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा.
उन्होंने कहा कि अब किसी भी कीमत पर क्षेत्र में दोबारा कोल टेस्टिंग बोरिंग का कार्य नहीं होने दिया जायेगा. नेताओं ने मशीनों को हटाये जाने को आंदोलन की बड़ी जीत बताया.
मुकदमे वापस लेने की मांग
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि कोल टेस्टिंग बोरिंग का विरोध करने वाले दर्जनों युवाओं एवं महिलाओं पर कथित रूप से फर्जी मुकदमे दर्ज किये गये हैं. उन्होंने सभी मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की. साथ ही रायमनी सोरेन की रिहाई की मांग भी उठायी गयी.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
नेताओं ने कहा कि रायमनी सोरेन पिछले तीन महीने से जेल में हैं और उनके दो छोटे बच्चे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी समाज, आदिवासी संघर्ष मोर्चा एवं भाकपा माले सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन तेज करेंगे. इसकी पूरी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी.
लगाये गये नारे
धरना के दौरान “बिना ग्रामसभा अनुमति कोल टेस्टिंग बोरिंग बंद करो”, “पेसा कानून का हनन बंद करो”, “काेल कंपनी वापस जाओ” समेत कई नारे लगाये गये. कार्यक्रम में सुरेश मुर्मू, रामेश्वर टुडू, सन्यासी हेंब्रम, जाम्बड़ू बास्की, बुद्धय किस्कू, मीकू टुडू, सागेन मुर्मू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
