मरांग बुरु थान का पुराना फोटो लगाने पर भड़के ग्रामीण, ओलचिकी में बैनर न लगवाने पर भी जताया आक्रोश
मरांग बुरु थान का पुराना फोटो लगाने पर भड़के ग्रामीण, ओलचिकी में बैनर न लगवाने पर भी जताया आक्रोश
संवाददाता, दुमका हिजला गांव के निवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मेले के तोरण द्वार और बैनरों में संताली की ओलचिकी लिपि का प्रयोग नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि मेला समिति की 27 जनवरी की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि सभी तोरण द्वार ओलचिकी लिपि में लिखे जाएंगे. इस निर्देश के तहत सभी तोरण द्वारों पर हिंदी और संताली ओलचिकी लिपि में लाइट डिस्प्ले के माध्यम से लेखन किया गया था. लेकिन मेले के शुरू होने से एक दिन पहले ही रातों-रात उसे हटा दिया गया. ग्रामीणों और संगठनों का मानना है कि मेला समिति किसी बाहरी दबाव में काम कर रही है. इसके साथ ही मेले में लगाए गए होर्डिंग और बैनरों में संताल आदिवासियों के पूज्य स्थल मरांग बुरु थान का वर्षों पुराना पुआल छावनी वाला चित्र लगाया गया है. परंपरा के अनुसार, मेला शुरू होने से पहले मरांग बुरु की पूजा की जाती है और उद्घाटन के बाद अधिकारी भी पूजा में भाग लेते हैं. दो वर्ष पहले दुमका के विधायक और पूर्व मंत्री बसंत सोरेन के प्रयासों से कच्चे थान के स्थान पर संगमरमर का नया थान बनाया गया था. इसके बावजूद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और मेला समिति ने लापरवाही बरतते हुए विधायक और सरकार के विकास कार्यों को नजरअंदाज किया है. ग्रामीणों की मांग है कि सभी बैनर और पोस्टरों में लगे मरांग बुरु थान के पुराने चित्र को हटाकर वर्तमान संगमरमर वाले थान का चित्र लगाया जाए. साथ ही, सभी तोरण द्वार और अन्य स्थानों पर भी ओलचिकी लिपि का प्रयोग किया जाए. यदि मेला समिति जल्द ही इस दिशा में आवश्यक कदम नहीं उठाती है तो ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करेंगे.इस मौके में हिजला गांव के ग्रामीण दिलीप सोरेन,गणेश हांसदा,अनिल टुडू,लाल हांसदा,मारग्रेट हांसदा,सोना सोरेन,मनोती हेम्ब्रम,पतामुनि सोरेन,स्वीटी सोरेन,लूली हांसदा,एमेल मरांडी,रुबिलाल हांसदा,संजय हांसदा,आजु हांसदा,लुखिराम हांसदा,विभीषण हांसदा,सोम हांसदा,प्रकाश सोरेन,संतोष हेम्ब्रम,सुनील सोरेन,सोनोत हांसदा उपस्थित थे.
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