दुमका. संताल परगना क्षेत्र में ग्राम स्वशासन, भूमि अधिकार और प्रशासनिक सुधारों को लेकर ग्राम प्रधान-मांझी संगठन ने राज्य सरकार के समक्ष नौ सूत्री मांगें रखी और धरना-प्रदर्शन किया. प्रमंडलीय अध्यक्ष भीम प्रसाद मंडल की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिये झारखंड पेसा एक्ट नियमावली 2025 को निरस्त कर मूल झारखंड पेसा एक्ट 1996 के प्रावधानों के अनुरूप नयी नियमावली लागू करने की मांग प्रमुख रूप से उठायी गयी. साथ ही संगठन ने ग्राम सभा को ग्राम की सर्वोच्च इकाई घोषित करने, ग्राम प्रधानों को ग्राम सभा की अध्यक्षता सौंपने तथा ग्राम सभा को वास्तविक प्रशासनिक और विकासात्मक अधिकार प्रदान करने की मांग की. श्री मंडल ने संताल परगना प्रमंडल के सभी जिलों में कार्यरत ग्राम प्रधानों एवं पारंपरिक पदधारियों जैसे जोगमांझी, परानिक, नायकी, कुड़ाम नायकी, गुड़ैत आदि को सरकार की ओर से दस-दस लाख रुपये का जीवन बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की. कहा कि भूमि संबंधी मुद्दों पर मांगपत्र में 1932 के गैंजर सेटलमेंट के अनुरूप अंतिम प्रकाशन दस्तावेजों में सही जमाबंदी संख्या, लगान एवं रकबा दर्ज करने, साथ ही वर्तमान सर्वे रिकॉर्ड में ग्राम प्रधानों का नाम दर्ज होने चाहिए. इसकी मांग लंबे समय से हो रही है, पर सरकार उसकी अनदेखी कर रही है. इसके अतिरिक्त उन्होंने हाल के दिनों में हुई भूमि संबंधित अनियमितताओं की जांच ईडी, सीबीआई एवं आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग भी की. अन्य वक्ताओं ने संताल परगना क्षेत्र में कृषि को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से “हर खेत को पानी” योजना के तहत गंगा नदी से पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, ग्राम स्वशासन के अंतर्गत ग्राम स्तर पर विकास कार्यों के लिए समुचित राशि सीधे ग्राम सभा को देने और योजनाओं के क्रियान्वयन का अधिकार ग्राम सभा को सौंपने की बात कही. इसके अलावा प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए संताल परगना स्तर पर “ग्राम प्रधान परिषद” के गठन, 1932 के गैंजर सेटलमेंट के खतियान के आधार पर स्थानीयता नीति एवं नियोजन नीति तय करने तथा संताल परगना प्रमंडल मुख्यालय दुमका में झारखंड हाईकोर्ट के खंडपीठ की स्थापना की मांग भी उठायी गयी.
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