आज का दौर विज्ञान और नवाचार का, बिक रहे हैं आपकी बुद्धि और विचार

सीमित संसाधनों के बावजूद यदि शिक्षक, पदाधिकारी और कर्मचारी छात्रहित को केंद्र में रखकर सामूहिक प्रयास करें, तो गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा केवल सपना नहीं, साकार यथार्थ बन सकती है.

दुमका. सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय का 34वां स्थापना दिवस शनिवार को हर्षोल्लास, गरिमा और आत्ममंथन के माहौल में मनाया गया. समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं वर्तमान लोकपाल प्रो डॉ मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने विश्वविद्यालय को “अंतहीन बहती हुई धारा” बताते हुए कहा कि किसी संस्थान के लिए 34 वर्ष बहुत बड़ा समय नहीं होता. संस्थान बनने में युग लगते हैं, लेकिन कम समय में इस विश्वविद्यालय ने अपनी एक लंबी और गहरी लकीर खींची है. उन्होंने प्रथम सांसद स्व. लाल बाबा हेंब्रम को स्मरण करते हुए कहा कि यह दिन ऐसे व्यक्तित्व को याद करने का दिन है, जिसने कॉलेज नहीं देखा, लेकिन संसद में जाकर अपने क्षेत्र के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा का स्वप्न दृढ़ता से रखा. उनको याद करने का दिन है जिसने इस विश्वविद्यालय की ईंट रखी. यह दिन विश्वविद्यालय की नींव रखने वालों को नमन करने और अपने मील के पत्थरों को सामने से देखने का अवसर है. प्रो सिन्हा ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की 34 वर्षों की यात्रा संघर्ष, समर्पण और निरंतर प्रगति की जीवंत गाथा है. सीमित संसाधनों के बावजूद यदि शिक्षक, पदाधिकारी और कर्मचारी छात्रहित को केंद्र में रखकर सामूहिक प्रयास करें, तो गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा केवल सपना नहीं, साकार यथार्थ बन सकती है. उन्होंने कहा कि उन्हें तीन वर्षों तक इस विश्वविद्यालय के साथ कार्य करने का अवसर मिला, जिसे वे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं. उन्होंने शिक्षक पेशे की गरिमा पर भावपूर्ण शब्दों में कहा कि हम शिक्षक यह नहीं जानते कि आज जिन छात्रों को पढ़ा रहे हैं, वे भविष्य में कहां होंगे, उनसे फिर कभी मुलाकात होगी भी या नहीं, फिर भी उनकी भलाई की कामना लेकर कक्षा में प्रवेश करते हैं. यही ‘नोबिलिटी ऑफ द प्रोफेशन’ है. शिक्षक अभाव की नहीं, कर्तव्य की चर्चा करता है. अभाव, समस्या और कठिनाइयों के बावजूद कोई शिक्षक यह नहीं कहता कि वेतन नहीं मिला तो नहीं पढ़ाएंगे. वह पढ़ाता है. डॉक्टर शुल्क मांग सकता है, वकील फीस तय कर सकता है, लेकिन शिक्षक बिना शर्त ज्ञान देता है. समय पर पदोन्नति न मिले, सुविधाएं न हों, फिर भी शिक्षक उसी लगन से कक्षा में जाता है. यही इस पेशे की आत्मा है. सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज के लिए और अधिक उपयोगी होने का अवसर है. समाज को आपके अनुभव, आपकी उर्वर बुद्धि और आपके चिंतन का फल चाहिए. इसलिए जहां भी रहें, सक्रिय रहें, रचनात्मक रहें. उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और नवाचार का युग है, जहां विचार बिक रहे हैं. सॉफ्टवेयर भौतिक रूप से दिखायी नहीं देता, फिर भी असाधारण मूल्य पर बिकता है, क्योंकि उसमें बुद्धि लगी होती है. यही शक्ति हमारे विद्यार्थियों में है, हमारे शिक्षकों में है और शिक्षकेत्तर कर्मियों में है, जो विद्यार्थी और शिक्षक के बीच सेतु बनते हैं. अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो डॉ कुनुल कांडिर ने वीर शहीद सिदो-कान्हु मुर्मू को नमन करते हुए कहा कि प्रकृति की गोद में स्थित इस विश्वविद्यालय का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पूर्ण क्रियान्वयन, समय पर परीक्षा, सत्र नियमितीकरण, नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत, शोध, खेल एवं प्लेसमेंट सेल को सशक्त बनाने पर जोर दिया. उन्होंने लॉ की पढ़ाई पुनः आरंभ कराने और पीजी छात्राओं के लिए कैंपस में शीघ्र छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जतायी. विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित समारोह की शुरुआत स्मारक टीला पर वीर शहीद सिदो-कान्हू मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई. इसके बाद पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया. सभागार में दीप प्रज्ज्वलन एवं कुलगीत के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ. कुलसचिव डॉ राजीव रंजन शर्मा ने स्वागत भाषण दिया. इस अवसर पर वर्ष 2024 एवं 2025 में सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को सम्मानित किया गया. शिक्षकेत्तर प्रतिनिधि परिमल कुंदन ने लंबित वेतन निर्धारण, पदोन्नति एवं नियमितीकरण मामलों के समाधान की मांग रखी. शिक्षक प्रतिनिधि डॉ पीपी सिंह ने पूर्व कुलपति के कार्यकाल की उपलब्धियों को रेखांकित किया. सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ महेश्वर गोईत ने पदोन्नति संबंधी मामलों पर शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जतायी. प्रॉक्टर डॉ राजीव कुमार ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व तक विश्वविद्यालय के 125 से अधिक मामले उच्च न्यायालय में लंबित थे, जो अब घटकर लगभग 50 रह गए हैं. उन्होंने कहा कि लोक अदालत की तर्ज पर विश्वविद्यालय स्तर पर सुलहनीय मामलों के समाधान का प्रयास किया जाएगा. डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ जैनेंद्र यादव ने छात्र संख्या, लिंगानुपात एवं सकल नामांकन दर में वृद्धि से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की. वहीं ओएसडी (अकादमिक) डॉ अमिता कुमारी, परीक्षा नियंत्रक रीना नीलिमा लकड़ा, सीसीडीसी डॉ अब्दुस सत्तार, वित्त पदाधिकारी डॉ संजय कुमार सिन्हा एवं डीएसडब्ल्यू डॉ जैनेंद्र यादव ने क्रमशः अकादमिक, परीक्षा, विकास, वित्त एवं छात्र कल्याण से जुड़ी रिपोर्ट प्रस्तुत की. कार्यक्रम के दौरान एसपी महिला कॉलेज एवं एसपी कॉलेज की छात्राओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गयीं. समारोह का समापन वित्त सलाहकार बृजनंदन ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Binay kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >