बासुकिनाथ मंदिर परिसर स्थित झूलन मंदिर में पांच दिवसीय झूलनोत्सव शुरू

यह उत्सव राधा-कृष्ण की प्रतिमा को झूले पर बिठाकर, आकर्षक ढंग से सजाकर मनाया जाता है.

बासुकिनाथ. सावन माह की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि मंगलवार से बासुकिनाथ मंदिर परिसर स्थित झूलन मंदिर में पांच दिवसीय झूलनोत्सव प्रारंभ हो गया है. झूलनोत्सव के पावन अवसर पर झूलन मंदिर को फूलों से आकर्षक और मनभावन तरीके से सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया गया है. यह उत्सव राधा-कृष्ण की प्रतिमा को झूले पर बिठाकर, आकर्षक ढंग से सजाकर मनाया जाता है. ठाकुरबाड़ी के पुजारी पंडित सारंग झा, राजेश झा, संतोष झा आदि ने बताया कि लगभग सात दशक से झूलन मंदिर में प्रत्येक वर्ष सावन के पावन महीना के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि से सावन पूर्णिमा तक झूलन मंदिर में श्रीकृष्ण एवं राधा रानी को पीतल से निर्मित झूले में झुलाया जाता है. पंडित संतोष झा ने बताया कि यह उत्सव भगवान कृष्ण की भक्ति और आराधना का एक महत्वपूर्ण पर्व है. इस अवसर पर प्रत्येक दिन नगरवासियों और आगंतुक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ झूलन मंदिर में उमड़ती है. हालांकि सावन के महीने में नगरवासियों को बिना पास के मंदिर परिसर में प्रवेश करने नहीं दिया जाता है. इससे नगर निवासी झूलनोत्सव में भाग नहीं ले पाते हैं. इसका मलाल बासुकिनाथ के सभी नगर निवासियों को रह जाता है. संध्या आरती के बाद झूलन मंदिर में प्रसाद वितरण किया जाता है. झूलनोत्सव का समापन सावन पूर्णिमा के दिन होगा. कारू बाबा ने बताया कि जब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर कर दिया तो सभी गोकुलवासियों को घोर आश्चर्य हुआ, क्योंकि बचपन में ही पूतना वध, कालिया नाग मर्दन से लेकर गोवर्धन पर्वत उठाना साधारण मनुष्य के वश की बात नहीं थी, तब कृष्ण ने अपनी लीला दिखायी तो सभी ग्रामवासी लौट गए, परंतु गोपियां वहां रह गयी. बाद में कृष्ण ने सभी गोपियों के साथ उल्लास मनाया. यह अद्भुत दृश्य देखने लायक था. इसमें ईश्वर की असीम कृपा थी. सभी आनंद में झूला झूलने लगे.

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Published by: Anand jaswal

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