महुलबना व बागदुमी की रीना यादव व मुन्नी देवी किसानों के बनीं प्रेरणास्रोत
पौधे से दो माह में तैयार हो जाता है फलप्रतिनिधि, मसलियाकृषि की बात करें तो अमूमन धान और गेहूं की खेती ही ज्यादा प्रचलन में देखी जाती है. बीते कुछ वर्षों में प्रमुख फसलों के साथ ही कृषक अन्य कई मौसमी फसलों की कृषि कर अतिरिक्त कमाई कर खुद को सशक्त बना रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र में भी कृषि क्षेत्र में नयी क्रांति देखने को मिल रही है. प्रखंड के महुलबना व बागदुमी गांव की दो महिला कृषक रीना यादव व मुन्नी देवी स्ट्राबेरी की कृषि से जुड़ कर अच्छा मुनाफा कमी रही रहीं है. कृषि की नयी तकनीक का उपयोग कर इन्होंने स्ट्राबेरी का उत्पादन करना शुरू कर दिया है. बाजार में स्ट्राबेरी की डिमांड काफी है. ताजा स्ट्राबेरी लेने के लिए लोग गांव तक पहुंचने लगे हैं. जेएसएलपीएस की मदद से इन महिलाओं को उद्यान विभाग से स्ट्राबेरी का पौधा उपलब्ध कराया गया था. इसकी फसल करीब दो माह में तैयार हो जाती है. इन दोनों की सफलता जहां उनके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुई है. वहीं इसने पूरे प्रखंड के किसानों को नयी कृषि तकनीकों को अपना कर खेती में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है. कृषक रीना व मुन्नी देवी ने बताया कि इसकी कृषि के बारे में जानने के बाद उन्होंने इसे अपनी किस्मत बदलने का सुनहरा अवसर समझते हुए स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर कदम बढ़ाया.
टपक सिंचाई पद्धति व आर्गेनिक खाद का किया उपयोग
कृषि में टपक सिंचाई पद्धति से फसलों की सिंचाई एवं ऑर्गेनिक खाद का उपयोग किया जाता है. नयी तकनीक के साथ पहली बार खेती में कुछ कठिनाइयों के बावजूद अपनी मेहनत से पहले ही प्रयास में ही सफलता हासिल करने पर महिला कृषक गदगद है. महिला कृषकों की प्रशंसा करते हुए बीडीओ मो अजफर हसनैन ने कहा कि मनरेगा के तहत बिरसा हरित ग्राम योजना के अंदर बाग़दुमी की महिला कृषक मुन्नी देवी द्वारा स्ट्राबेरी की सफल खेती को देखते हुए इसकी खेती के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के इच्छुक कृषकों का चयन किया जा रहा है.
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