पुस्तकालय व सड़क सुरक्षा पर दिया विशेष जोर
बैठक के दौरान जिले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यों की एक-एक कर विस्तृत समीक्षा की गयी.
विस कमेटी ने की विकास योजनाओं की समीक्षा, विधायक आलोक सोरेन व जयराम महतो हुए शामिल
दुमका. झारखंड विधानसभा के पुस्तकालय समिति की बैठक परिसदन में आयोजित की गयी, जिसमें समिति सदस्य सह शिकारीपाड़ा विधायक आलोक सोरेन एवं डुमरी विधायक जयराम महतो उपस्थित थे. बैठक के दौरान जिले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यों की एक-एक कर विस्तृत समीक्षा की गयी. बैठक में पुस्तकालय समिति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विधायक आलोक सोरेन ने कहा कि पुस्तकालय सूचना व शिक्षा का बैकबोन है, जो आनेवाली पीढ़ियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने जिले में संचालित सरकारी पुस्तकालयों की जानकारी देते हुए बताया कि दुमका में स्टेट लाइब्रेरी संचालित है, जिसमें कुल 4,986 पंजीकृत सदस्य हैं. पुस्तकालय में वाई-फाई सुविधा उपलब्ध है. पुस्तक रहित सदस्यता शुल्क ₹150 तथा पुस्तक सहित सदस्यता शुल्क ₹250 निर्धारित है. पुस्तकालय में 188 लोगों के बैठने की व्यवस्था है तथा कुल 21,388 पुस्तकें विभिन्न विषयों पर उपलब्ध हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित पुस्तकों की भी पर्याप्त व्यवस्था है. उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकालय में स्थानीय इतिहास से संबंधित पुस्तकों को भी शामिल किया जाये. बैठक में बताया गया कि जिले की विभिन्न पंचायतों में कुल 168 ज्ञान केंद्र संचालित हैं. साथ ही बाल सुधार गृहों में बेहतर पुस्तकालय व्यवस्था सुनिश्चित करने, प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय कक्ष अनिवार्य करने तथा पुस्तकालयों में फीडबैक सिस्टम लागू करने पर बल दिया गया. बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गयी. बताया कि कम उम्र के युवक दुर्घटनाओं के अधिक शिकार हो रहे हैं. इस पर डुमरी विधायक जयराम महतो ने सुझाव दिया कि बिना हेलमेट चलने वालों को हेलमेट खरीदने का अवसर देकर ही आगे जाने दिया जाये. सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने, पेट्रोलिंग बढ़ाने तथा स्कूल व पुस्तकालय के आसपास किसी भी प्रकार की नशीली पदार्थों की दुकानें नहीं रहने देने का निर्देश दिया गया. कल्याण विभाग द्वारा बताया गया कि जिले में विभिन्न कॉलेजों से संबद्ध कुल 35 छात्रावास संचालित हैं. पेयजल योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया गया कि गर्मी से पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाये. ताकि जल संकट उत्पन्न न हो. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना व मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे कार्यों तथा मनरेगा योजनाओं की समीक्षा की गयी. बताया कि मनरेगा के तहत “उन्नति कार्यक्रम” संचालित है, जिसमें 100 दिन का कार्य पूरा कर चुके श्रमिकों को स्किल डेवलपमेंट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने जिले के अस्पतालों की स्थिति की जानकारी दी. बताया गया कि मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के अंतर्गत वर्तमान में राशि उपलब्ध नहीं है, जिसके लिए मांग भेजी गई है. श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिक से अधिक श्रमिकों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया. “अपनार आतो कामी अभियान” के तहत श्रमिकों का निबंधन कार्य जारी है. भवन निर्माण विभाग ने जानकारी दी कि कल्याण विभाग के अंतर्गत 50-50 बेड के तीन छात्रावासों का निर्माण कार्य प्रगति पर है. साथ ही तीन एफसीआई गोदामों का निर्माण भी कराया जा रहा है. बैठक में वन विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पथ निर्माण विभाग तथा डीएमएफटी के तहत संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गयी. केंद्र सरकार की योजनाओं, पीएम जनमन सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में विधायक जयराम महतो द्वारा सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का निर्देश दिया गया, ताकि आम जनता को अधिकतम लाभ मिल सके. हेमंत सरकार में विकास की रफ्तार धीमी : जयराम दुमका. डुमरी विधायक जयराम महतो ने नगर निकाय चुनाव दलगत आधार पर कराये जाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि नगर निकाय ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत चुनाव भी दलगत आधार पर होने चाहिए. इससे किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा और शहर व गांव दोनों स्तर पर स्पष्ट जनादेश के साथ सरकार बनेगी. कहा कि भाजपा की तरह वे भी नगर निकाय चुनाव को दलगत कराने के पक्षधर हैं. वे झारखंड विधानसभा की पुस्तकालय विकास समिति की बैठक में भाग लेने दुमका पहुंचे थे. कहा कि जब वे राज्य के विभिन्न जिलों में जाते हैं तो यह साफ दिखता है कि पिछली सरकारों की तुलना में वर्तमान सरकार में विकास कार्यों की गति काफी धीमी है.पेसा नियमावली को बताया त्रुटिपूर्ण
जयराम महतो ने कहा कि पेसा कानून झारखंड के आदिवासी समाज और ग्रामीण जनता की अंतरात्मा की आवाज था, लेकिन हेमंत सरकार द्वारा पारित नियमावली में कई जरूरी सुधारों की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमावली में ग्राम सभा को वास्तविक अधिकार नहीं मिल पा रहा है और कई शक्तियां अधिकारियों के हाथों में चली गयी हैं, जो पेसा की मूल भावना के विपरीत है. उन्होंने कहा कि इसी कारण आज इस कानून का विरोध हो रहा है और यह विरोध जायज है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मौजूदा पेसा नियमावली से संतुष्ट नहीं हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
