सोहराय सभ्यता व संस्कृति का प्रतीक, पशुधन से बढ़े लगाव

जरमुंडी में प्रखंडस्तरीय सोहराय पर्व सह मिलन समारोह का आयोजन, बोलीं प्रमुख

By RAKESH KUMAR | January 5, 2026 10:54 PM

बासुकिनाथ. जरमुंडी प्रखंड मुख्यालय मैदान में सोमवार को प्रखंडस्तरीय सोहराय पर्व सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया. मौके पर आदिवासी संस्कृति व सभ्यता का पर्व सोहराय धूमधाम से मनाया गया. इससे पूर्व कार्यक्रम स्थल पर परंपरागत तरीके से प्रमुख बसंती टुडू, उप प्रमुख प्रयाग मंडल, बीडीओ कुंदन भगत, सीओ संजय कुमार, पोड़ैयाहाट के बीडीओ फुलेश्वर मुर्मू व अन्य का परंपरागत स्वागत किया गया. सामूहिक रूप से आताड़ दाराम दिसोम सोहराय पोरोब पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. प्रखंड प्रमुख बसंती टुडू ने बताया कि सोहराय हमारी सभ्यता- संस्कृति का प्रतीक है. यह पर्व पालतू पशु और मानव के बीच गहरा प्रेम स्थापित करता है. सोहराय पर्व मनाने का मुख्य उद्देश्य मवेशी को खुश करना है. पूर्व मुखिया बलराम सोरेन ने बताया कि सोहराय के पहिला दिन गढ़ पूजा पर चावल गुंडी के कई खंड का निर्माण कर पहला खंड में अंडा रखा जाता है. गाय-बैलों को इकट्ठा कर छोड़ा जाता है, जो गाय या बैल अंडे को फोड़ता या सुंघता है. उन बैल गायों के सिंग पर तेल लगाये जाने की परंपरा रही है. दूसरे दिन गोहाल पूजा पर मांझी थान में युवकों द्वारा लाठी खेल के प्रदर्शन की परंपरा है. रात्रि को गोहाल में पशुधन के नाम पर पूजा की जाती है. तीसरे दिन खुंटैव पूजा पर प्रत्येक घर के द्वार पर बैलों को बांधकर पीठा पकवान की माला पहनायी जाती है. ढोल ढाक बजाते हुए पीठा को छीनने का खेल होता है. चौथे दिन जाली पूजा पर घर-घर में चंदा उठाकर प्रधान को दिया जाता है. मौके पर सोहराय के उल्लास में मांदर की थाप पर पारंपरिक सामूहिक नृत्य गीत चलता है. सोहराय का पांचवा दिन हांकु काटकम कहलाता है. इस दिन आदिवासी लोग मछली, ककड़ी पकड़ते हैं. छठे दिन आदिवासी झूंड में शिकार के लिए निकलते हैं. शिकार में प्राप्त खरगोश, तीतर आदि जंतुओं को मांझीथान में इकठ्ठा कर घर-घर प्रसादी के रूप में बांटा जाता है. संक्रांति के दिन को बेंझा तुय कहा जाता है. इस दिन गांव के बाहर नायकी समेत अन्य लोग ऐराडम पेंड़ को गाड़कर तीर चलाते हैं. मौके पर अतिथि मांझी बाबा संतलाल मरांडी, नायकी बाबा शिशु हांसदा, मुखिया बलराम सोरेन, शिवलाल सोरेन समेत 27 पंचायतों के मुखिया, बीपीओ सुलेमान हेंब्रम, शिवलाल सोरेन, मंसू मरांडी, शिवलाल किस्कू, छोटका मरांडी, मताल हेंब्रम, वीरेंद्र कुमार हेंब्रम समेत सभी मांझी, जोंगमांझी नायकी, पराणिक, गोड़ैत, प्रधान आदि अन्य मौजूद थे.

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