एसपी काॅलेज में मना सोहराय, मांदर पर झूमे युवा

प्रकृति, परंपरा और उत्साह के संगम में शुक्रवार को एसपी कॉलेज परिसर पूरी तरह डूबा नजर आया.

By RAKESH KUMAR | January 10, 2026 12:01 AM

दुमका. प्रकृति, परंपरा और उत्साह के संगम में शुक्रवार को एसपी कॉलेज परिसर पूरी तरह डूबा नजर आया. मांदर और तमाक की थाप, पारंपरिक वेशभूषा में सजी छात्राएं, पूजा स्थल पर होते विधि-विधान और हर चेहरे पर मुस्कान… कुछ ऐसा दृश्य था दिसोम सोहराय पर्व के दौरान. पूरा कॉलेज परिसर आदिवासी लोकसंस्कृति की डूब गया. सुबह कॉलेज मैदान में बने गोड़ टांड़ी में नामकी बाबूधन टुडू, रोहित मुर्मू व गुड़ाम नायकी राजीव हांसदा ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की. इस दौरान मुर्गा और अंडा चढ़ाया गया. सुड़ा-दाका बना कर सभी छात्र-छात्राओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. नायकी व गोड़ैत ने पशुधन की समृद्धि, अच्छी फसल और खुशहाली के लिए प्रार्थना की. प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त किया. दिसोम सोहराय पर महिला कॉलेज की छात्राएं पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते हुए एसपी कॉलेज परिसर पहुंचीं, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो गया. इसके बाद मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन व एसपी कॉलेज के प्राचार्य खिरोधर प्रसाद ने प्रथम सांसद सह कॉलेज संस्थापक स्व लाल बाबा हेंब्रम की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. अतिथियों को पारंपरिक नृत्य एवं वाद्य यंत्रों के साथ कार्यक्रम स्थल तक लाया गया, जहां गिधनी छात्रावास की छात्राओं संतोनी किस्कू, रीमा किस्कू, सरोबली हांसदा, मेरीला हांसदा, पिंकी मरांडी व प्रिसीला सोरेन ने लोटा-पानी से पारंपरिक स्वागत किया. इसके बाद छात्र-छात्राओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, सिदो कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू, प्राचार्य खिरोधर प्रसाद एवं विधायक पुरण लाल टुडू को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने दीप प्रज्ज्वलित कर सोहराय पर्व का उद्घाटन किया. सभा को संबोधित करते हुए एसपी कॉलेज के प्राचार्य खिरोधर प्रसाद ने कहा कि सोहराय पर्व प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेशवाहक है. समाजसेवी सनातन मरांडी ने कहा कि सोहराय पर्व हर गांव में मनाया जाना चाहिए, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके. सिदो-कान्हू मुर्मू के वंशज मंडल मुर्मू ने कहा कि सिदो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में संताल समाज ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखा. आदिवासी समाज की भाषा और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए सोहराय पर्व का निरंतर आयोजन जरूरी है. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि दिसोम सोहराय आदिवासी संस्कृति की पहचान है. यह पर्व विशेष रूप से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि जब से मानव ने प्रकृति और पशुओं के साथ सामंजस्य का रिश्ता बनाया है, तभी से सोहराय पर्व मनाया जा रहा है. आदिवासी समाज परंपरागत रूप से गाय-बैलों के सींगों में तेल और सिंदूर लगाकर पशुधन के प्रति सम्मान प्रकट करता है. पूरे कार्यक्रम के दौरान कॉलेज परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा. बड़ी संख्या में छात्राएं पारंपरिक परिधान में सेल्फी लेती नजर आईं और युवा मांदर की थाप पर थिरकते दिखे. कार्यक्रम में अंचलाधिकारी अमर कुमार, समाजसेवी सनातन मरांडी, बाबूलाल मरांडी, चंचल गोस्वामी, सिमल सोरेन, दयानिधि दुबे, गुरु प्रसाद महतो, छात्र नेताओं में श्यामदेव हेंब्रम, राजीव बास्की, ठाकुर हांसदा, राजेंद्र मुर्मू, शिवलाल सोरेन, सुलिश सोरेन, रितेश मुर्मू, बिमल मुर्मू, संजय हांसदा सहित सभी छात्रावासों के छात्र नायक एवं छात्रा नायिका उपस्थित थे.

आदिवासी अस्तित्व को खत्म करने की हो रही साजिश : चंपाई सोरेन

दिसोम सागुन सोहराय पर्व के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने पेसा नियमावली को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समुदाय के अस्तित्व को कमजोर करने की मंशा से पेसा नियमावली ला रही है. उन्होंने कहा कि यह नियमावली आदिवासियों की धार्मिक, सामाजिक परंपराओं और संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा को समाप्त करने का प्रयास है. चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के नेतृत्व ढांचे में बाहरी लोगों को शामिल कर उन्हें कानूनी मान्यता दी गयी है, जिससे ग्राम सभा व्यवस्था पूरी तरह कमजोर हो गयी है. उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक रूप से राज्यपाल की भूमिका होनी चाहिए, लेकिन उपायुक्त को सर्वोच्च अधिकारी बना दिया गया है. इससे ग्राम सभा की शक्तियां सीमित हुई हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली के विरोध में आंदोलन चलाया जाएगा और गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया जायेगा.

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