बोल-बम के जयकारे से गुंजायमान हो रही बाबानगरी

राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव के सातवें दिन गुरुवार को बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में शिव भक्तों की भीड़ लगी रही.

श्रावणी मेला. मंदिर में 75,925 कांवरियों ने बाबा का किया जलाभिषेक, मंदिर परिसर में की आरती बाबा फौजदारी के दरबार में जलाभिषेक के बाद ही भक्तों की कांवर यात्रा होती है पूरी प्रतिनिधि बासुकीनाथ राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव के सातवें दिन गुरुवार को बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में शिव भक्तों की भीड़ लगी रही. बाबा बासुकिनाथ की महिमा अपरंपार है, यहां जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान शिव से मुराद मांगते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है. इसके साथ ही धार्मिक मान्यता यह भी है कि कांवर यात्रा तभी पूरी मानी जाती है, जब सावन में श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर बाबा बैद्यनाथधाम में जलार्पण के बाद बाबा फौजदारीनाथ के दरबार पहुंचते हैं, उनका जलाभिषेक करते हैं. यहां पर शिव भक्त जो भी मन्नत मांगते हैं. वो जल्द ही पूरी होती है. यहां जलाभिषेक के बाद ही भक्तों की कांवर यात्रा पूरी होती है. दो बजे रात से ही मंदिर प्रांगण शिवगंगा घाट मेला परिसर कांवरियों से पटा रहा. सरकारी पूजा के बाद तीन बजे भोर से कतारबद्ध कांवरियों ने गर्भगृह में जलार्पण शुरू किया. फौजदारी दरबार में पहुंचते ही कांवरियों की थकान मिट जाती है, यहां पर भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती है. मंदिर प्रबंधन के अनुसार 75,925 कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ पर जलार्पण कर मंगलकामना की. मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंजता रहा. श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा पर जलार्पण किया. मंदिर प्रांगण में अधिकारियों ने कांवरियों की कतार को सुचारू रूप से गर्भगृह में प्रवेश कराया. कांवरियों की श्रद्धा भक्ति और आस्था देखते ही बन रही थी. कांवरियों की कतार संस्कार मंडप, फलाहारी धर्मशाला, क्यू कॉम्प्लेक्स, शिवगंगा तट तक सिमटी रही. वहीं मंदिर संकीर्तनशाला के पास जलार्पण काउंटर पर शिवभक्त कांवरियों ने जल डाला. गुरुवार को मंदिर प्रबंधन के अनुसार 4,670 श्रद्धालुओं ने जलार्पण काउंटर का लाभ उठाया. काउंटर पर डाले गये जल सीधे पाइपलाइन द्वारा मंदिर गर्भगृह में शिवलिंग पर गिरता है. कांवरियों की भीड़ को देखते हुए दिन के साढ़े 12 बजे मंदिर गर्भगृह गेट पर अरघा लगाया गया. भीड़ घटने के बाद अरघा हटा लिया गया. 9,92,316 रुपये की आमदनी प्राप्त हुई मंदिर न्यास परिषद को गुरुवार को मंदिर से कुल 9,92,316 रुपये प्राप्त हुए. मंदिर प्रभारी सह बीडीओ कुंदन भगत ने बताया कि मंदिर गर्भगृह गोलक से 81,350 रुपये व अन्य स्रोतों से 40 हजार 966 रुपये प्राप्त हुए. गोलक से 180 ग्राम चांदी प्राप्त हुआ. गोलक से निकले राशि की गिनती मंदिर प्रशासनिक भवन में सीसीटीवी की निगरानी में की गयी. 2900 कांवरियों ने किया शीघ्रदर्शनम मंदिर कार्यालय के अनुसार गुरुवार को 2900 कांवरियों ने शीघ्रदर्शनम व्यवस्था का लाभ उठाया. शीघ्रदर्शनम कूपन से 8 लाख 70 हजार रुपये प्राप्त हुए. इस व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को मंदिर कार्यालय से 300 रुपये का रसीद कटाना पड़ता है. मंदिर सिंह दरवाजे से रसीद प्राप्त कर मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं को वीआइपी गेट से गर्भगृह में दर्शन पूजन कराया. शीघ्रदर्शनम व्यवस्था पर श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता व्यक्त की. वहीं शिवगंगा में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एनडीआरएफ की टीम तीन शिफ्ट में सक्रिय है. बोल बम के मंत्र से होती त्रिदेवों की कृपा श्रावणी मास में बोल बम के मंत्र से त्रिदेवों की कृपा प्राप्त होती है. सावन के पवित्र महीना में उतरवाहिनी गंगाजी से जल भरकर बैद्यनाथधाम फिर बासुकिनाथ धाम तक करीब 150 किलोमीटर तक लंबी कांवर यात्रा में कांवरिया बोल बम मंत्र का जाप करते रहते हैं. पंडित सुधाकर झा ने बताया कि इस महीने में बोल बम का मंत्र भगवान शिव को अति प्रिय है. जाप से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. महामंत्र के गुर सारतत्व में ब्रह्मा, विष्णु व महेश के स्वरूप का तत्व शामिल है. इसके उच्चारण मात्र से ही त्रिदेवों की कृपा प्राप्त होती है. भगवान शिव के एक नाम के जाप से जितनी पाप का क्षय होता है, उतना पाप तो मनुष्य जीवन में कर ही नहीं सकता है. पंडित नकुल झा ने बताया कि शिवनाम के प्रभाव से ही पापी ब्रम्हाणी का उद्धार हुआ, उसे शिवत्व की प्राप्ति हुई थी. बोल बम का मंत्र श्रद्धापूर्वक जाप करने वाले भक्त को तीनों देवों की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

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Published by: Anand jaswal

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