रानीश्वर: प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत मयुराक्षी नदी के मसानजोर में डैम बनने के बाद रानीश्वर प्रखंड क्षेत्र में बड़ा नदी, दिगलपहाड़ी और कैराबनी में दो पहाड़ों के बीच झरने को बांधकर मिट्टी का डैम बनाया गया था. इस ऐतिहासिक दिगलपहाड़ी डैम के पास बना वन विभाग का डाक बंगला तो अधिकारियों के पिकनिक मनाने के कारण चकाचक है, लेकिन वहीं दूसरी ओर मानव संसाधन विकास विभाग का यूथ हॉस्टल देखरेख के अभाव में पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है.
अफसरों के लिए वीआईपी बंगला चकाचक, युवाओं का हॉस्टल बर्बाद
दिगलपहाड़ी डैम के निर्माण के बाद पहाड़ के ऊपर बाईं ओर वन विभाग ने एक शानदार बंगले का निर्माण कराया था. समय-समय पर मरम्मत होने की वजह से इस डाक बंगले की स्थिति आज भी काफी अच्छी है. वक्त-वक्त पर बड़े पदाधिकारी और रसूखदार लोग पिकनिक मनाने और छुट्टियां बिताने पहुंचते हैं. इसके ठीक उलट, डैम के नीचे दाईं ओर बना यूथ हॉस्टल आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है.
तीन दशक से कोई कर्मचारी नहीं, वीरान हुआ यूथ हॉस्टल
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, यह मानव संसाधन विकास विभाग का यूथ हॉस्टल था. करीब तीन दशक पहले तक यहां इसकी देखभाल के लिए एक सरकारी कर्मचारी तैनात था. उसके बाद से यहां न तो कोई कर्मी रहा और न ही भवन की मेंटेनेंस की गई. नतीजा यह हुआ कि अतिथियों के ठहरने के लिए फर्नीचर से सजे कमरे, विश्रामागार, शौचालय, किचन शेड और कुएं जैसी तमाम सुविधाएं आज मलबे में बदल चुकी हैं. हॉस्टल की छत पर टीन के ऊपर खपड़ा बिछा था, जो अब ढहने की कगार पर है और चारों तरफ घनी झाड़ियां उग आई हैं.
पुनर्निर्माण से बढ़ेगी इलाके की रौनक, स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
डैम और पहाड़ की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित इस जगह को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उम्मीदें हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार इस यूथ हॉस्टल और बंगले का फिर से जीर्णोद्धार (पुनर्निर्माण) कराती है, तो यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. इससे न केवल दिगलपहाड़ी इलाके की रौनक लौटेगी, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए साधन भी उपलब्ध हो सकेंगे.
