प्रभात खबर के आपके द्वार. चिहुटिया के पहाड़िया ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन से पूछा सवाल प्रतिनिधि, रामगढ़ प्रखंड की भातुड़िया बी पंचायत के चिहुटिया गांव के आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की आबादी वाले खर्रा डंगाल में सही मायनों में विकास की किरण कब पहुंचेगी. यह यक्ष प्रश्न है. प्रभात खबर के प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में गांव की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बातें रखी. बताया कि खर्रा डंगाल पंचायत मुख्यालय भातुड़िया बी से लगभग पांच किलोमीटर तथा प्रखंड मुख्यालय रामगढ़ से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है. खर्रा टोले में केवल पहाड़िया समुदाय की आबादी निवास करती है. यहां तक पहुंचाने के लिए सड़क नहीं है. लोग पगडंडियों से गुजर कर गांव तक पहुंचते हैं. गांव में सिंचाई के लिए मात्र एक कूप है. पेयजल की व्यवस्था नहीं है. एकमात्र चापाकल काफी देर तक चलाने के बाद थोड़ा बहुत पानी देता है. वह भी गंदा. पेयजल के लिए लोग सिंचाई कूप पर निर्भर हैं. नहाने, कपड़े धोने एवं मवेशियों के लिये गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बहने वाली जोरिया के चेकडैम पर निर्भर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी में चेकडैम का पानी सूख जायेगा. सिंचाई कूप भी सूख जायेगा. लगभग पांच साल पूर्व गांव में सौर ऊर्जा चालित जलमीनार लगी थी. पर वह अपनी स्थापना कल से ही बंद पड़ी है. ग्रामीण के अनुसार जलमीनार का बोरिंग धंस चुका है. पहाड़िया कल्याण के बड़े-बड़े दावों के बावजूद विकास नहीं हो पाया है. इसको लेकर ग्रामीणों ने प्रखंड प्रशासन से सवाल भी पूछे हैं. क्या कहते हैं ग्रामीण ऐसा लगता है कि पहाड़िया समुदाय का गांव होने के कारण खर्रा डंगाल का विकास न तो स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता है. न ही जन प्रतिनिधियों की. अंछू देहरी. वैसे तो हमारा गांव कई समस्याओं से घिरा है. लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए आज तक सड़क का न होना हमारी सबसे बड़ी समस्या है. पहल हो. सुरेंद्र देहरी. हमलोग सिंचाई कूप का पानी पी रहे हैं. सरकार पीने के पानी की व्यवस्था करे. सौर संचालित जलमीनार की गर्मी से पहले मरम्मत करायी जाये. फूलमनी देहरीन. गरीबी के कारण यहां की बच्चियां चौथी-पांचवी क्लास के बाद ही पढ़ना छोड़ देती हैं. उन बच्चियों का कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन कराया जाये. लीला कुमारी पहाड़िया पांच साल पूरे गांव में जलमीनार लगी थी. पर वह बेकार पड़ी है. पानी की समस्या अभी भी बरकरार है. प्रखंड प्रशासन को पहल करने की जरूरत है. रेखा देहरीन. गांव में कई परिवार अभी भी कच्ची झोपड़ियों में रह रहे हैं, उन्हें आवास योजना का लाभ दिया जाये. गर्मी से पहले जलसंकट का समाधान होना चाहिए. देवली देहरीन जलमीनार की मरम्मत करने के साथ-साथ खराब पड़े चापाकल की मरम्मत भी करायी जाये.ताकि जल संकट की समस्या लोगों को निजात मिल सके. आशा देहरीन. अभी तो जोरिया के पानी से हमारा काम चल रहा है. लेकिन गर्मी आते ही जोरिया सूख जायेगी. फिर हमारा क्या होगा. जल्द पहल होनी चाहिए. रसौली देहरीन यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सिंचाई की व्यवस्था हो. सिंचाई का साधन होगा तभी हम अपनी उन्नति कर पायेंगे. वीरेंद्र देहरी गांव को सड़क से जोड़ा जाये. पानी की व्यवस्था हो. दोनों ही बुनियादी जरूरत है. सड़क रहेगी, तभी गांव तक विकास पहुंचेंगे. शिबू देहरी मनरेगा के सिंचाई तालाब के नाम पर गांव के आसपास में कई गड्ढे बना दिये गये हैं. किसी में भी एक बूंद पानी नहीं है. तालाब निर्माण की जांच हो. शर्मिला देहरीन. हमारे गांव में कई परिवार गृह विहीन हैं, उन्हें आवास योजना का लाभ दिया जाये. आज संपन्न लोगों तक योजनाएं पहुंच रही, पर हम जैसे गरीब तक नहीं. अर्जुन देहरी.
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