संवाद : बारिश के बाद चांदोपानी-चंद्रपुरा सड़क हो गयी है बदहाल, जल्द मरम्मत कराये प्रशासन

काठीकुंड प्रखंड क्षेत्र के चांदोपानी गांव में प्रभात खबर संवाद का आयोजन किया गया. इस दौरान ग्रामीणों ने बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि बरसात में चांदोपानी-चंद्रपुरा जानेवाली लगभग दो किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बदहाल हो गयी है.

मांग. प्रभात खबर संवाद में चांदोपानी के ग्रामीणों ने सुनायी परेशानी, कहा प्रतिनिधि, काठीकुंड काठीकुंड प्रखंड क्षेत्र के चांदोपानी गांव में प्रभात खबर संवाद का आयोजन किया गया. इस दौरान ग्रामीणों ने बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि बरसात में चांदोपानी-चंद्रपुरा जानेवाली लगभग दो किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बदहाल हो गयी है. आवाजाही करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है. प्रशासन जल्द सड़क की बदहाली दूर कराये. यह सड़क चांदोपानी, आमझरी, कर्णपुरा सहित कई गांवों का ग्रामीण मार्ग है जो इन्हें दुमका–पाकुड़ मुख्य मार्ग से जोड़ती है. बरसात के कारण सड़क पूरी तरह कीचड़ से पट चुकी है, जिससे पैदल चलना तो दूर, साइकिल और बाइक से गुजरना भी खतरे से खाली नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते से रोजाना ढेरों छात्र स्कूल जाते हैं. लेकिन फिसलन और कीचड़ के कारण बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई बार छात्र रास्ते में फिसलकर चोटिल भी हो जाते हैं या कपड़े गंदे होने के कारण वापस घर की ओर जाना उनकी मजबूरी हो जाती है. दूसरी ओर वैकल्पिक मार्ग भी समस्या से मुक्त नहीं है. चांदोपानी से रांगामटिया होकर काठीकुंड जाने वाला रास्ता लंबा और जर्जर है, वहीं आमझरी होकर जाने वाले मार्ग पर कोयला वाहनों का इतना दबाव रहता है कि ग्रामीण उस रास्ते से चलने से कतराते हैं. ग्रामीणों ने प्रभात खबर प्रतिनिधि के समक्ष समस्याएं रखते हुए कहा कि बरसात में यह सड़क दलदल जैसी हो जाती है. किसी बीमार को अस्पताल ले जाना हो या सामान लेकर बाजार जाना हो, हर बार लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि वर्षों से इस सड़क की मरम्मत की मांग हो रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. बताया कि केवल बारिश ही नहीं बल्कि सामान्य दिनों में भी इस रास्ते पर बने अनगिनत गड्ढे आने-जाने वाले के लिए सिरदर्द बने रहते हैं. कुल मिलाकर चांदोपानी–चंद्रपुरा सड़क की दुर्दशा ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को कठिन बना दिया है. स्कूल जाने वाले बच्चे हों या बाजार-प्रखंड का काम करनेवाले लोग, सभी को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. ग्रामीण वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस कच्ची सड़क का पक्कीकरण या पीसीसी निर्माण कराया जाये, ताकि लंबे अरसे से चली आ रही इस परेशानियों से उन्हें मुक्ति मिले. क्या कहते हैं ग्रामीण बरसात में सड़क कीचड़ से भर जाती है. किसी बीमार को अस्पताल ले जाना हो तो मुश्किल हो जाता है. रोजाना इसी रास्ते पर ग्रामीणों की जिंदगी संकट में पड़ जाती है. तौफीक अंसारी गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला मार्ग वर्षों से उपेक्षित है. फिसलन व गड्ढों के कारण बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ती है. पक्की सड़क जल्द बने. निर्मल सोरेन “बरसात ही नहीं, सामान्य दिनों में भी यह सड़क परेशानी देती है. कपड़े गंदे हो जाने पर बच्चों को स्कूल से लौटना पड़ता है. पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है. पक्कीकरण हो. बॉबी देवी “प्रशासन को तुरंत इस सड़क का पक्कीकरण करना चाहिए. वैकल्पिक रास्ते जर्जर हैं. और कोयला वाहनों के कारण आमझरी मार्ग पर चलना असंभव हो गया है. पहल हो. श्रीनाथ किस्कू रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गयी है. बाजार जाना हो या कोई जरूरी सामान लाना, हर बार इस फिसलन भरी राहों में गिरने का खतरा बना हमेशा रहता है.” सुंदर हेंब्रम बरसात में बच्चे स्कूल पहुंचते ही गंदे और थक जाते हैं. कभी-कभी चोटिल भी हो जाते हैं. भविष्य को संवारने के लिए सुरक्षित मार्ग जरूरी है. प्रखंड प्रशासन जल्द पहल करे. सिकंदर सिंह सड़क पर बने गड्ढों से साइकिल या बाइक ले जाना असंभव हो गया है. सड़क हादसे की आशंका हमेशा बनी रहती है. आखिर कब तक ऐसे ही हालात रहेंगे. पहल होनी चाहिए. सहकार अंसारी बरसात में यहां आवागमन ठप हो जाता है. महिलाएं और बुजुर्ग इस रास्ते से गुजरने में सबसे ज्यादा कठिनाई झेलते हैं. जल्दी समाधान आवश्यक है.ताकि परेशानी दूर हो सके. सुजाता सोरेन गांव से प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है. सड़क की मरम्मत नहीं होने से लोगों की परेशानियां साल दर साल बढ़ रही हैं. बुनियादी समस्याएं दूर हो. मुस्लिम मियां हर दिन गिरते-पड़ते किसी तरह स्कूल पहुंचते हैं. पढ़ाई से ज्यादा डर इस रास्ते का होता है. हम चाहते हैं कि सड़क पक्की हो, ताकि सुरक्षित आ-जा सके. प्रशासन पहल करे. रोहित राय, छात्र

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Published by: Anand jaswal

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