शुल्क देकर स्टेशन में टू-व्हीलर पार्किंग नहीं करने पर झेलनी पड़ रही फजीहत

पार्किंग शुल्क की रसीद नहीं मिलने की वजह से लोगों को हो रहा संदेह कि यह अर्थदंड सरकार के खाते में जा रही या किसी की जेब में.

दुमका. अगर आप अपने किसी परिजन को दुमका रेलवे स्टेशन छोड़ने बाइक से जा रहे हैं तो वहां अब बड़े शहरों की तरह पार्किंग में ही वाहन खड़ी करनी होगी. शुल्क देना होगा. ऐसा आप नहीं करते हैं, तो आपको 500 रुपये तक का अर्थदंड भरना पड़ सकता है. ऐसा रोजाना हो रहा है और दर्जनों लोगों को ऐसे अर्थदंड लगाये जा रहे हैं. यह जायज भी है कि यह अर्थदंड सरकार के खाते में जा रही या किसी की जेब में. क्योंकि जब दंड वसूला जाता है, तो रसीद नहीं दी जाती है. बाइक स्टैंड के संवेदक के लिए वहां पहले से ही जवानों को रेलवे के अधिकारी द्वारा तैनात किया गया है. निर्धारित जगह से बाहर बिना पार्किंग शुल्क दिये स्टेशन में घुसते ही बाइक को बिना आपको कोई जानकारी दिए उठाकर आरपीएफ पोस्ट ले जाया जाएगा और आपसे जुर्माना वसूला जाएगा. अगर आप राशि देने में आनाकानी करते हैं तो आपको और भी प्रताड़ना सहना पड़ सकता है. आम लोगों व यात्रियों की सुविधा को लेकर उपराजधानी दुमका के रेलवे स्टेशन पर कानून में कोई लचीलापन नहीं हैं. हां संवेदक को लाभ पहुंचाने व आम लोगों को परेशान किए जाने के लिए कानून को काफी सख्त कर जुर्माना जरूर वसूला जा रहा है, ताकि आपको भले ही दो मिनट का ही रेलवे स्टेशन में काम हो, आप स्टैंड में संवेदक द्वारा तय राशि का भुगतान कर अपनी बाइक को लगाने के लिए मजबूर हो जाएं. इस वजह से आए दिन संवेदक व जवानों के साथ रेल यात्रियों व आम लोगों के बीच तनातनी होती रहती है. हाल ही में दुधानी के रहने वाले महेंद्र साह के साथ भी ऐसा ही हुआ, वे अपने बेटे को स्टेशन पहुंचाने के लिए गये थे. बाहर निकलने के बाद संवेदक के कर्मियों से पूछताछ की तो जवाब मिला कि आपकी बाइक चोरी हो गयी होगी. स्टैंड में बाइक नहीं लगाओगे तो इसकी जिम्मेवारी नहीं होगी. काफी खोजबीन के बाद जब आरपीएफ के जवानों से बात की तो आरपीएफ पोस्ट उन्हें भेज दिया गया. जहां उसे पता चला कि आरपीएफ के जवानों ने उसकी बाइक को नो पार्किंग के नाम पर जब्त कर लिया है. 500 रुपए की जुर्माना वसूली की डिमांड हुई, काफी मिन्नत के बाद मामला 200 रुपए तक पहुंचा. पैसे देकर वे बाइक छुड़ाकर लाए. महेंद्र ने बताया कि उनसे दंड वसूला गया, पर रसीद नहीं दी गयी.

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Author: RAKESH KUMAR

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