दुमका में प्रज्ञा केंद्र संचालकों का हल्ला बोल: मानदेय और बकाया भुगतान की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

Dumka Protest: दुमका जिले के पंचायत प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने मानदेय में बढ़ोतरी और लंबित भुतानों को लेकर समाहरणालय परिसर में प्रदर्शन किया. संचालकों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम मानदेय 7,550 रुपये करने और प्रमाण पत्रों में हस्ताक्षर की अनिवार्यता सहित कई मांगें रखी हैं.

Dumka Protest, दुमका, (तपेश कुमार की रिपोर्ट): दुमका जिला मुख्यालय स्थित पुराना समाहरणालय परिसर में शुक्रवार को पंचायत प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया. जिले के विभिन्न प्रखंडों से जुटे संचालकों ने अपनी समस्याओं के समाधान हेतु उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा. संचालकों का स्पष्ट कहना है कि वे सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को ग्रामीण स्तर पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में वे स्वयं गंभीर आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं.

मानदेय में भारी विसंगति का आरोप

संचालकों ने मानदेय में व्याप्त विसंगतियों पर गहरा रोष व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि पंचायती राज समझौते के प्रावधानों के अनुसार उन्हें प्रतिमाह न्यूनतम 7,550 रुपये मानदेय मिलना चाहिए. इसके विपरीत, वर्तमान में उन्हें केवल 2,475 रुपये का ही भुगतान किया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए ऊंट के मुंह में जीरा समान है. संचालकों ने इस न्यूनतम राशि को तत्काल प्रभावी करने और पिछले सभी लंबित भुतानों को एकमुश्त जारी करने की मांग की है.

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प्रमाण पत्रों में सत्यापन और अधिकारों की मांग

आर्थिक मांगों के अतिरिक्त, संचालकों ने अपनी कार्यप्रणाली में प्रशासनिक भागीदारी बढ़ाने की मांग रखी है. उन्होंने जाति, निवास और आय प्रमाण पत्रों के निर्गत होने की प्रक्रिया में पंचायत प्रज्ञा केंद्र संचालक का सत्यापन, मोहर और हस्ताक्षर अनिवार्य करने की बात कही. संचालकों का तर्क है कि इससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों पर लगाम लगेगी. साथ ही, उन्होंने वृद्धा, विधवा और सर्वजन पेंशन के ऑनलाइन कार्यों को पूर्ण रूप से पंचायत स्तर पर संचालकों के माध्यम से ही कराने का आग्रह किया.

महंगाई के अनुरूप सेवा शुल्क में संशोधन की अपील

संचालकों ने मनरेगा जॉब कार्ड, डेटा एंट्री और मास्टर रोल जैसे कार्यों को भी पंचायत से ही संचालित करने की मांग उठाई है. उन्होंने व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि कार्य की उपलब्धता हो या न हो, उन्हें प्रतिदिन सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक केंद्र पर उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है. बिना किसी निश्चित पारिश्रमिक के इस बाध्यता से उनकी स्थिति और अधिक बिगड़ रही है. उन्होंने सेवा शुल्क दर को भी वर्तमान महंगाई दर के अनुरूप संशोधित करने की अपील की है.

प्रदर्शन में ये रहे शामिल

इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष बिरेंद्र प्रसाद साह, सचिव हारून मियां, सह सचिव रूपेश कुमार, उपाध्यक्ष मुकेश कुमार पाल, कोषाध्यक्ष परितोष कुमार सहित सुनीराम सोरेन, उपेंद्र कुमार पाल, मोहन कुमार झा, विश्वजीत भंडारी, अजय कुमार दास और विपुल कुमार मोदी सहित भारी संख्या में प्रज्ञा केंद्र संचालक उपस्थित थे. संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो वे आगे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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