शिकारीपाड़ा. शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के बादलपाड़ा मौजा में एसडीएम सह प्रशिक्षु आईएएस अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में जिला स्तरीय टीम द्वारा शनिवार को अवैध कोयला खदानों की डोजरिंग करायी गयी. इस दौरान जेसीबी मशीन द्वारा 10 अवैध कोयला खदानों को मिट्टी डालकर कर बंद किया गया. प्रशिक्षु आईएएस श्री प्रकाश ने बताया कि बादलपाड़ा मौजा के आसपास स्थित अवैध कोयला खदानों से साइकिल व बाइक द्वारा कोयला निकालने की सूचना के आधार पर छापेमारी अभियान चलाया गया. अभियान के दौरान बादलपाड़ा मौजा के आसपास कुछ रैयती जमीन व कुछ वन भूमि में 10 अवैध कोयला खदानों की डोजरिंग कराकर बंद कराया गया है. यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. बादलपाड़ा क्षेत्र के अवैध कोयला खदानों से निकाला गया कोयला साइकिल, बाइक आदि से आसपास के क्षेत्र में खपाया जाता है. साथ ही पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र में डंप किया जाता है.जहां से विभिन्न क्षेत्रों में उक्त अवैध कोयला को भेजा जाता है. टीम में सीओ कपिलदेव ठाकुर, जिला खनन कार्यालय के निरीक्षक ब्रह्मदेव यादव व गौरव कुमार सिंह तथा थाना प्रभारी अमित कुमार लकड़ा दल-बल के साथ शामिल थे.
उठने लगे सवाल, आखिर कौन है अवैध कोयला कारोबार का किंगपिन :
दुमका जिले के शिकारीपाड़ा-गोपीकांदर में अवैध कोयला खदानों का संचालन आज से नहीं हो रहा है. अवैध कोयला खदानों के डोजरिंग के नाम पर महज आइवाश ही प्रशासन करता रहा है. डोजरिंग के चंद दिन बाद ही फिर से अवैध कोयला उत्खनन शुरू हो जाना यहां आम बात है. अवैध कोयला कारोबार के किंगपिन को आज तक यहां का प्रशासन दबोच नहीं पाया है. हर बार डोजरिंग के चार-पांच दिन बाद अवैध कोयला का कारोबार बढ़ता ही जाता है. पहले शिकारीपाड़ा में चार-पांच अलग-अलग लोकेशन में अवैध कोयला का कारोबार होता था और कुल मिलाकर अठारह-बीस अवैध खदान संचालित होते थे. अब तो बादलपाड़ा में ही अकेले दस अवैध खदान संचालित हो रहे थे. शिकारीपाड़ा में अवैध कोयले के किंगपिन के अब तक नहीं धरे जाने से सवाल भी उठने लगे हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
