संताली भाषा-साहित्य के संरक्षण को लेकर हुआ विमर्श

संताली लैंग्वेज एंड कल्चरल एसोसिएशन की हुई बैठक

By RAKESH KUMAR | January 12, 2026 11:44 PM

दुमका. संताली लैंग्वेज एंड कल्चरल एसोसिएशन की केंद्रीय कमेटी की बैठक सोमवार को कडहरबील में वर्णवास भूषण किस्कू की अध्यक्षता में संपन्न हुई. इसका मुख्य उद्देश्य भारत की तीसरी सबसे बड़ी आदिवासी जनजाति संताल समुदाय की पारंपरिक एवं मूल संताली भाषा-साहित्य का संरक्षण, संवर्द्धन और विकास सुनिश्चित करना रहा. बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री किस्कू ने कहा कि बदलते परिवेश में संताली भाषा पर बाहरी भाषाओं के बढ़ते प्रभाव के कारण इसके मूल स्वरूप के विलोप होने का खतरा बढ़ गया है. इसे देखते हुए संताली के शुद्ध उच्चारण, भावार्थ और पारंपरिक स्वरूप को प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए संगठित प्रयास की आवश्यकता है. बैठक में उपस्थित प्रबुद्ध संताली विद्वानों ने संताली भाषा-साहित्य के विकास और पठन-पाठन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया. निर्णय लिया गया कि संताली भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े कार्य कर रहे स्थानीय सामाजिक संगठनों, संस्थाओं, संघों एवं ट्रस्टों के साथ नेटवर्किंग और आपसी समन्वय स्थापित कर आमजन एवं छात्र-छात्राओं के लिए संताली भाषा के अध्ययन-अध्यापन से जुड़ी सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. बैठक में प्रबुद्ध संताली ज्ञाता के रूप में एन्नोसेंट सोरेन, शिवलाल बी मरांडी, इग्नाशियुस मरांडी, माईकेल हांसदा, हाबिल मुर्मू एवं दानिएल हांसदा उपस्थित थे.

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