दुमका : आदिवासी सेंगेल अभियान व झारखंड दिशोम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुरमू ने कहा है कि सीएनटी-एसपीटी में संशोधन के मुद्दे पर आदिवासियों के लिए आज के दिन सबसे बड़ा गद्दार अगर कोई है, तो वह जनजातीय परामर्शदातृ समिति के वे 19 सदस्य, जो आदिवासी समाज से ही आते हैं और आदिवासियों के लिए आरक्षित सीट से ही चुन कर विधायक बनने के बाद सदन तक पहुंचे हैं.
दुमका परिसदन में श्री मुरमू ने कहा कि जनजातीय परामर्शदातृ समिति ही अगर इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगाती, तो यह विधानसभा तक पहुंच भी नहीं पाता.
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्रित्व काल में ही इन कानूनों में संशोधन की पहल हुई थी, जिसे रघुवर सरकार ने आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों ने झामुमो का सदैव साथ दिया, लेकिन झामुमो ने जो किया, वह संदेह पैदा करने वाला है. उनके विधायकों को चाहिए कि वे इस्तीफा देकर आदिवासियों का कर्ज चुकायें और आदिवासी समाज को बचाने की पहल करें.
