50 पैसे में मिनरल वाटर उपलब्ध कराने की योजना निकली हवा-हवाई

29 लाख की योजना का लोगाें को 29 दिन भी नहीं मिला लाभ चलंत वाटर प्यूरीफिकेशन यूनिट को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिखाया था हरी झंडी आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पानी वाले इलाकों में सस्ती दर पर मिनरल वाटर उपलब्ध कराना था योजना का मुख्य उद्देश्य दुमका : पेयजल एवं स्वच्छता विभाग दुमका के […]

29 लाख की योजना का लोगाें को 29 दिन भी नहीं मिला लाभ

चलंत वाटर प्यूरीफिकेशन यूनिट को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिखाया था हरी झंडी
आर्सेनिक व फ्लोराइड युक्त पानी वाले इलाकों में सस्ती दर पर मिनरल वाटर उपलब्ध कराना था योजना का मुख्य उद्देश्य
दुमका : पेयजल एवं स्वच्छता विभाग दुमका के परिसर में खड़ा यह एक ट्रक पिछले ढ़ाई साल से यूं ही धूल फांक रहा है. 29 लाख रुपये की लागत से इस वाहन की खरीद 2013 में ही हुई थी. तब मुख्यमंत्री थे हेमंत सोरेन. श्री सोरेन ने ही 2 अक्तूबर के दिन इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. इस वाहन में वाटर प्यूरीफिकेशन यूनिट लगी हुई है,
जो सामान्य पानी को पीने लायक शुद्ध बनाने की क्षमता रखती है. इस वाहन का मकसद ऐसे इलाकों में सीलबंद पानी बेहद सस्ते कीमत पर उपलब्ध कराने की थी, जिन इलाकों में आर्सेनिक, फ्लोराइड अथवा अत्यधिक आयरन युक्त पानी ही उपलब्ध है. इस वाहन में पानी को शुद्ध करने के अलावा उसे सीलबंद करने के भी मशीन ली हुई हैं. जिसमें 300 एमएल व 600 एमएल के पाउच चलती गाड़ी में तैयार किये जा सकते थे. मगर ये सपना आखिरकार सपना ही बन रह गया.
दुमका ही नहीं चार और जिलों में है ऐसे वाहन
दुमका सहित अन्य चार जिलों में यह चलंत इकाइयां बेकार हो चुकी है. एक वाहन में 29 लाख रुपये खर्च हुए, पर इसके रख-रखाव की चिंता विभाग ने और सरकार ने नहीं की. चंद दिनों तक यह वाहन तो घूमता नजर आया, पर महीने भर के अंदर इस वाहन की गति को विराम लग गयी. अन्य जिलों में भी इस वाहन का उपयोग नहीं हो पाने की बात विभागीय अधिकारी कह रहे हैं.
हैदराबाद की कंपनी ने की थी आपूर्ति
दुमका के अलावा साहिबगंज, पलामू, रांची और देवघर में ऐसे वाहन की आपूर्ति हैदराबाद की एक कंपनी ने की थी. कार्यपालक अभियंता मंगल पूर्ति कहते हैं कि जब तक चालक और इसके ट्रेंड आॅपरेटर नहीं रहेंगे, इसे चलाया नहीं जा सकता. वाहन में छोटे-छोटे उपकरण हैं. ऐसे में दक्ष आॅपरेटर की गैर मौजूदगी में इसका संचालन करना संभव नहीं है. लिहाजा वाहन का उपयोग नहीं हो पा रहा है. जिस कारण कम कीमत पर लोगों को पानी पिलाने की योजना पर ग्रहण लग गया है.

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