आलिम-फाजिल की डिग्री को मिले मान्यता
यूजी व पीजी के समान ही मान्यता देने की मांग
संताल परगना से जुटे थे सैकड़ों लोग
दुमका : तहफ्फुजे नामूसे रिसालत व तालिमी बेदारी काॅन्फ्रेंस का आयोजन दुमका के गांधी मैदान में ख्वाजा गरीब नवाज मुस्लिम कल्याण समिति द्वारा किया गया. जिसमें आलिम व फाजिल की डिग्री को राज्य में फिर से यूजी व पीजी के समान मान्यता देने की मांग उठायी गयी. काॅन्फ्रेंस में पूरे संताल परगना के विभिन्न जिलों से सैकड़ों लोगों ने शिरकत की. मुख्य वक्ता के तौर पर पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना ओबैदुल्ला खां आजमी ने मुस्लिमों को अपने हक-हकूक के लिए जोरदार तरीके से आवाज उठाने का एलान किया. अपने संबोधन में मौलाना आजमी ने कहा कि अल्पसंख्यकों को इल्म हासिल करनी होगी,
तभी इस समाज की तरक्की संभव है. देश धर्मनिरपेक्ष है. देश में सभी के लिए कानून बराबर है. इसलिए सरकार की सबों के लिए समान नजरिया होनी चाहिए. बिहार के समय में आलिम-फाजिल की मान्यता थी. इसकी मान्यता को खत्म करना गैर वाजिब है. उन्होंने कहा कि सरकार नहीं सुनती, तो विपक्ष को साथ लें, आवाज बुलंद करें. जरूरत पड़े तो अदालत भी जाएं. कााॅन्फ्रेंस को मौलाना मतिउर रहमान, मो अब्दुस्सलाम अंसारी, झामुमो जिलाध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह, मो सईर्दुरहमान मिसवाही, मो नजरूल इस्लाम, गोड्डा के प्रो क्युम, जामताड़ा के मो महफूज आलम, मो मौलाना मोव्बशेरुल इस्लाम आदि ने संबोधित किया. मंच का संचालन रज्जाक कादरी ने किया, जबकि सदारत मौलाना सईदुर्रहमान मिसवाही ने किया.
