नहीं बदली रांगा पंचायत की सूरत

सांसद आदर्श ग्राम पंचायत का हाल. साल भर बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस दुमका : दुमका जिले के जिस रांगा पंचायत को सांसद शिबू सोरेन ने ‘आदर्श ग्राम पंचायत’ बनाने के लिए चुना है, उस पंचायत की तसवीर पिछले सवा साल में नहीं बदली है. इस पंचायत के लोग अभी भी बुनियादी […]

सांसद आदर्श ग्राम पंचायत का हाल. साल भर बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस
दुमका : दुमका जिले के जिस रांगा पंचायत को सांसद शिबू सोरेन ने ‘आदर्श ग्राम पंचायत’ बनाने के लिए चुना है, उस पंचायत की तसवीर पिछले सवा साल में नहीं बदली है. इस पंचायत के लोग अभी भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं. पंचायत में लताबड़, गोवासोल, रांगा, महेशापाथर, नागरापाथर, मसलिया, रामखड़ी, झिलुवा व काटाडुमर गांव हैं. गांवों में स्वच्छ पेयजल का अभाव है.
सिंचाई के साधन नहीं है. वहीं स्वास्थ्य केंद्र के भवन बने हैं वो अब तक खुले नहीं हैं. सड़कों की सूरत भी नहीं बदली है.
आर्थिक समृद्धि और किसानों की खुशहाली के लिए भी अपेक्षानुरूप कुछ भी नहीं हो पाया है. खुद इस पंचायत के मुखिया तथा क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य भी मानते हैं कि तस्वीर नहीं बदली. स्थिति वहीं है. जो आदर्श पंचायत के रूप में चुने जाने से पहले थी.
एक से दस तक ही कक्षाएं, शिक्षक महज दो
इस पंचायत में एकमात्र उच्च विद्यालय गोवासोल है. मध्य विद्यालय को उत्क्रमित कर इसे उच्च विद्यालय का दरजा दिया गया है. शिक्षक की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्य विद्यालय था, तो इसमें आठ शिक्षक के पद सृजित थे. हाई स्कूल बनने के बाद उसमें 11 शिक्षक व 2 शिक्षकेत्तर कर्मचारी के पद सृजित किये गये. बहरहाल मध्य विद्यालय के ही दो शिक्षक पहली से दसवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हैं.
पटवन के साधन नहीं, सूखने लगे तालाब
इस पंचायत में रहने वाले ग्रामीणों की आजीविका का सबसे बड़ा साधन खेती ही है. पर धान की फसल काटने के बाद उनके खेत वीरान पड़े हैं. दूर-दूर तक किसी भी खेत में कोई भी फसल नहीं दिखती. पटवन के साधन नहीं रहने से किसान चाहकर भी साल में एक से अधिक फसल नहीं ले पाते. ठंड अभी पूरी तरह से गयी नहीं और गरमी ने दस्तक दिया नहीं, पर तालाब और जोरिया सूख चुके हैं. किसानों के साथ-साथ ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है.
गांवों को जोड़ने वाली सड़क बदहाल
इस पंचायत के अंतर्गत कुल नौ गांव हैं. गांवों को जोड़ने वाली सड़कों का हाल बेहद ही बुरा है.चाहे वह लताबड़ जाने वाली सड़क हो या फिर रामखड़ी. नारायणपुर से आमगाछी पहाड़िया बस्ती जाने के लिए तो जो सड़क है, उसके नुकीले पत्थर देखकर लोग यही कहते हैं कि कच्ची पगडंडी ही होती, तो इससे बेहतर रहता. ऐसी सड़क से सुविधा कम, हादसा ज्यादा हो रहे हैं. आये दिन साइकिल-मोटरसाइकिल से गिरकर लोग चोटिल हो रहे हैं.

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