छह प्रखंड संस्थागत प्रसव में पीछे

दुमका : दुमका जिले में संस्थागत प्रसव के मामले में कुल दस में से छह प्रखंड औसत से भी पीछे हैं. सदर अस्पताल, निजी अस्पताल एवं सदर प्रखंड में तो संस्थागत प्रसव 87 प्रतिशत हुए हैं, लेकिन रानीश्वर में यह महज 20 प्रतिशत, मसलिया में 26 प्रतिशत, रामगढ़ में 28 प्रतिशत, जरमुंडी व शिकारीपाड़ा में […]

दुमका : दुमका जिले में संस्थागत प्रसव के मामले में कुल दस में से छह प्रखंड औसत से भी पीछे हैं. सदर अस्पताल, निजी अस्पताल एवं सदर प्रखंड में तो संस्थागत प्रसव 87 प्रतिशत हुए हैं, लेकिन रानीश्वर में यह महज 20 प्रतिशत, मसलिया में 26 प्रतिशत, रामगढ़ में 28 प्रतिशत, जरमुंडी शिकारीपाड़ा में 34 प्रतिशत ही है.

उल्लेखनीय है कि सितंबर महीने तक 19458 के लक्ष्य के विरुद्ध 9292 संस्थागत प्रसव हुए हैं, जो कि 48 प्रतिशत है.

संसाधन चिकित्सक का अभाव बड़ा कारण

संस्थागत प्रसव उन क्षेत्रों में ही औसत से कम है, जहां संसाधन के अभाव हैं. भवन आदि तो बनाये गये हैं, लेकिन चिकित्सक की कमी है. जिन स्थानों पर चिकित्सा सुविधा बेहतर है, वहां संस्थागत प्रसव का आंकड़ा भी संतोषजनक है.

22 प्रतिशत बच्चे बीसीजी के टीके से वंचित

दुमका जिले में 22 प्रतिशत बच्चे बीसीजी का टीका पाने से वंचित हैं. सितंबर महीने तक लक्षित 16914 नवजात शिशुओं में से 13190 बच्चे ही बीसीजी का टीका लगवा पाये हैं. कुल 3724 बच्चे बीसीजी के टीके से वंचित हैं. इस मामले में भी रामगढ़, मसलिया, रानीश्वर, जरमुंडी, जामा और सरैयाहाट की स्थिति अच्छी नहीं है.

विफ्स प्रोग्राम के तहत 90016 छात्रों को जोड़े गये

शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग ने दुमका जिले में छात्रछात्राओं में रक्त अल्पता से उबारने के लिए विफ्स प्रोग्राम के तहत 860 स्कूलों के 90016 छात्रछात्राओं को जोड़ा है. कक्षा 6 से 12 तक के इन छात्रछात्राओं को समयसमय पर आयरन की गोली देने की व्यवस्था की गयी है.

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