बासुकिनाथ : शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि गुरुवार को भगवती दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी की पूजा–अर्चना की गयी. मंदिर व पूजा पंडालों में सप्तशती दुर्गा के पाठ से वातावरण गुंजायमान रहा. इधर सप्तमी को माता दुर्गा की प्राण–प्रतिष्ठा करने की तैयारी अंतिम चरण में है. इसके लिए मंदिर के पुजारी द्वारा माता विल्वभरणी को निमंत्रण दिया गया. इसमें बेल तोड़ने की परंपरा रही है. शुक्रवार को प्राण–प्रतिष्ठा के उपरांत मंदिरों के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जायेंगे.
मां शेरावाली के आगमन से बच्चे–बूढ़े और जवान सभी के चेहरे खुशी से खिले हुए हैं. चारों और उत्साह का माहौल है. लोगों की भीड़ ने बाजार में चार चांद लगा दिये हैं. इधर विभिन्न जगहों पर लगने वाले मेले के लिए दुकानें लगनी शुरू हो गयी है. आकर्षक प्रतिमा, भव्य तोरण द्वार व सुंदर सजावट का कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच गया है. प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में मुर्तिकार मां दुर्गा के प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हैं.
साधना से सिद्धि प्राप्त होती है
जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं जो साधना द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है. यदि इच्छित साधना से सिद्धि प्राप्त हो जाता है तो प्रत्येक साधना में चाहे वी योगी हो या फिर गृहस्थ, तपस्वी व सन्यासी को जीवन में सफलता निश्चित रूप से मिलती है.
कभी–कभी जीवन में कुछ दोष के कारण साधक को सफलता नहीं मिल पाती है. उसे दूर करने का एकमात्र उपाय गुरुमंत्र जप है. गुरु मंत्र में ही सभी दोषों को समाप्त करने की शक्ति है. यह माह साधना के दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
