रामगढ़ : प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद एक व्यक्ति की लाश तीन दिनों के बाद दफनाया जा सका. मामला रामगढ़ प्रखंड के महुबना पंचायत के कांगमारा गांव का है.
द्वारपहाड़ी के बड़ो किस्कू की शादी लगभग 30 साल पहले कांगमारा की धोलगो मुमरू के साथ हुई थी. शादी के बाद वह घर जमाई के रुप में ही कांगमारा में रहता था. 50 साल के बोड़ो की मौत 15 सितंबर को बेटी के घर कुशबेदिया में हुई थी.
जहां से परिवारवाले अंतिम संस्कार के लिए उसकी लाश को कांगमारा ले आए, लेकिन उसके चचेरे साले एवं अन्य ने उसके शव को कांगमारा की जमीन पर दफनाने देने से इनकार कर दिया.
उनलोगों के अनुसार संताली परंपरा में बेटी को पैतृक संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता है. यहां दफनाने से जमीन को लेकर दावा करने की आशंका से वे ऐसा विरोध कर रहे थे.
