हंसडीहा में सत्संग का 30वां वार्षिक अधिवेशन

प्रतिनिधि, हंसडीहाहंसडीहा के मध्य विद्यालय प्रांगण में केन्द्रीय संतमत सत्संग का दो दिवसीय 30वां वार्षिक अधिवेशन का समापन हुआ़ जिसमें आसपास गांवों के संतमत सत्संग प्रेमी बड़ी संख्या में पहुंचे तथा संत महात्माओं के दर्शन कर एवं प्रवचनों को शांतिपूर्ण तरीके से सुना़ इस कार्यक्रम में स्वामी प्रकाशानंद महाराज, स्वामी जगपाराजी महाराज, स्वामी आनन्दजी महाराज, […]

प्रतिनिधि, हंसडीहाहंसडीहा के मध्य विद्यालय प्रांगण में केन्द्रीय संतमत सत्संग का दो दिवसीय 30वां वार्षिक अधिवेशन का समापन हुआ़ जिसमें आसपास गांवों के संतमत सत्संग प्रेमी बड़ी संख्या में पहुंचे तथा संत महात्माओं के दर्शन कर एवं प्रवचनों को शांतिपूर्ण तरीके से सुना़ इस कार्यक्रम में स्वामी प्रकाशानंद महाराज, स्वामी जगपाराजी महाराज, स्वामी आनन्दजी महाराज, स्वामी निरंजनानन्द महाराज के प्रवचनों में रामचरित्र मानस का लंकाखंड एवं गुरु महाराज के अमृतवाणी का पाठ हुआ़ प्रवचन में युद्घ भूमि में रावण रथ पर था और रामजी पैदल थे़ यह देख विभीषण अधीर होकर रामजी से बोले कि हे नाथ आप न तो रथ पर सवार हो और न आपके पैरों में जूते है़ इस बलवान शत्रु को कैसे मार पायेंगे़ इस पर रामजी ने कहा सुनहु सखा कह कृपा निधाना जेहि जय होय से स्यन्दन आना़ सौरज धीरज तेहि रथ चाका सत्य सील दृढ ध्वजा पताका़ इस विषय पर महात्माओं ने विस्तारपूर्वक अपनी वाणी से समझाया़ केन्द्रीय संतमत सत्संग कमेटी के हरिओम बाबा, गणेश बाबा, सागर मंडल, सहदेव यादव, बेचन साह आदि आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल रहे.—————–फोटो- हंसडीहाप्रवचन करते साधु महात्मा

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