संवाददाता, दुमकाद्रविड़ समूह की तमिल एवं संताल परगना की मालतो भाषा के अंतरसंबंधों पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार को संपन्न हो गयी. जोहर में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और चेन्नई से आये भाषाविद् डॉ एन सुंदरम ने यहां के पहाडि़या समुदाय को भी तमिल क्षेत्र का भ्रमण कर द्रविड़ समूह के भाषा-भाषी से संपर्क स्थापित करना चाहिए और उनकी संस्कृति को समझने जानने का प्रयास करना चाहिए. इसके लिए झारखंड की सरकार को भी कदम उठाना होगा. विश्वविद्यालय भी इसके लिए साकारात्मक पहल कर सकती है.अंतिम दिन दो सत्र आयोजित हुए थे, जिनमें से प्रथम सत्र में गिरधारी लाल गंझू, डॉ खिरोधर प्रसाद यादव, कालीचरण देहरी, डॉ सुभाष चंद्र राय एवं वरीय पत्रकार सह पहाडि़या जीवन संस्कृति के विशेषज्ञ और पूर्वी भारत के पहाडि़या पुस्तक के लेखक अनूप कुमार वाजपेयी ने अपने शोधपत्रों को पढ़कर सुनाया तथा भाषाविदों के साथ खुली चरचा की. इस दौरान डॉ रामवरण चौधरी, डॉ सीएन मिश्रा, वाणी सेनगुप्त, दयामय मांझी, वीरेंद्र पहाडि़या, रामदुलाल देहरी, परीक्षित मंडल आदि मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन गौर कांत झा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अशोक सिंह ने किया.समापन समारोह के उपरांत मनोज पहाडि़या एवं मनोहर गृही के नेतृत्व में इन भाषाविदों को मुर्गाथली एवं कैराबनी के पहाड़ी क्षेत्र का भ्रमण कराते हुए वहांं बसे आदिम जनजातीय समुदाय के लोगों से संपर्क कराया गया, जहां इन्होंने उनके रहन-सहन, कला संस्कृति की जानकारी प्राप्त की.—————————–फोटो13 दुमका-सेमिनार——————————-
तमिल व मालतो भाषा के अंतर संबंधों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
संवाददाता, दुमकाद्रविड़ समूह की तमिल एवं संताल परगना की मालतो भाषा के अंतरसंबंधों पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार को संपन्न हो गयी. जोहर में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और चेन्नई से आये भाषाविद् डॉ एन सुंदरम ने यहां के पहाडि़या समुदाय को भी तमिल […]
