दुमका : कहने को तो दुमका उपराजधानी है, लेकिन उपराजधानी के अनुरूप शहर के विकास को लेकर सकारात्मक पहल नहीं हो रही है. पिछले एक दशक से दुमका में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन एक भूखंड तक नहीं तलाश सकी है. लिहाजा शहर का कचरा जहां-तहां फेंका जा रहा है.
शहर की सफाई भी ढंग से नहीं हो पा रही है. बक्सीबांध में जहां मैलगढ़ा चिह्न्ति था, आज वहां घनी आबादी बस चुकी है. उक्त स्थल पर नगर पर्षद के ट्रैक्टर हर दिन कचरा गिराता है, लेकिन उन कचरे के प्रबंधन-निष्पादन के लिए कोई उपाय नहीं किये गये हैं. कचरे का ढ़ेर पहाड़ी का रूप ले चुका है. आबादी वाला जगह हो जाने से अब वहां रहने वाले लोगों के लिए यह परेशानी का सबब भी बनता जा रहा है.
सड़ांध से लोगों का अपने घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है. हल्की बारिश में इससे दूषित पानी बहकर सड़कों पर आ जाया करती है. लिहाजा कई बार लोग मैलगड़ा को स्थानांतरित करने और कचरा का निष्पादन आबादी वाले इलाके से दूर करने की मांग करते रहे हैं.
