शनिवार रात को नौ घरों को किया था ध्वस्त
मसलिया : जिले के मसलिया प्रखंड के आबादी वाले इलाके से जंगली हाथियों का झुंड को अब तक बाहर नहीं निकाला जा सका है. प्रखंड के आस्ताजोड़ा गांव के कोरबनाटोला में जंगली हाथियों ने सोमवार की रात को फिर पांच घरों को ध्वस्त कर दिया. गांव के मालती देवी, लखीराम बास्की, परेश बास्की, जोधाई बास्की व नरेश बास्की के घर को तोड़ कर अनाज आदि जंगली हाथियों ने खा लिया. इससे पहले शनिवार रात को इसी टोला के नौ घरों को जंगली हाथियों का झुंड ने ध्वस्त कर दिया था.
बीडीओ संजय कुमार ने हाथी भगाने के नाम पर सिर्फ मिट्टी तेल दिया है. हाथी द्वारा घर तोड़ने वाले परिवार के सदस्यों को सरकारी नियमानुसार आवास देने की आश्वासन दिया गया था. लगातार पांच दिनों से 18 जंगली हाथियों का झुंड आस्ताजोड़ा गांव के पलास जंगल पर डेरा डाले है. प्रखंड के घांसीमारनी, बरमेसिया, कपसियो, भोकताडीह, जोवाबांक, गाड़ापाथर, जोगीडीह, घुरमुंदनी, आस्ताजोड़ा, कुरूवा, बास्कीडीह सहित दर्जनों गांव के लोग भयभीत हैं. रतजगा करने को विवश हैं. वन विभाग की टीम गांव तो पहुंची है. लेकिन हाथियों को यहां से भगाने में अब तक असमर्थ की साबित हुई है.
18 साल में हाथियों के उत्पात के 13200 से अधिक मामले
झारखंड गठन के 18 वर्षों में जंगली हाथियों के झुंड द्वारा किये गये उत्पात के13200 से अधिक मामले वन विभाग तक पहुंचे हैं. 70 व्यक्तियों की जान ले चुके 18 से 21 हाथियों वाले झुंड ने तकरीबन तीन दर्जन लोगों को घायल किया है. हाल ही में एक व्यक्ति की जान मसलिया में झूंड ने ले ली थी. पैंरों से रौंद कर मार डाला था. मौत के 69 मामलों में तकरीबन 90 लाख रुपये का मुआवजा सरकार को देना पड़ा है. वहीं आठ लाख रुपये से अधिक का मुआवजा घायलों को इलाज के लिए देना पड़ा है. इतना ही नहीं घर तोड़ने, फसल बर्बाद कर देने और अन्य तरह की क्षति के लिए 2.38 करोड़ रुपये मुआवजे अब तक बांटने पड़े हैं.
