करीब 20 करोड़ रुपये के रिंग रोड मुआवजा घोटाला मामले में प्रथम सत्र न्यायाधीश सह एसटी-एससी न्यायालय ने सोमवार को छह आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. कांड संख्या 34/16 में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने अग्रिम जमानत की मांग की थी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया.
छह आरोपियों ने दायर की थी याचिका, एसीबी ने किया विरोध
अग्रिम जमानत के लिए जय निवास पांडे, शास्त्री सुषमा प्रसाद, कानूनगो मिथिलेश कुमार, दैनिक अमीन हरीश कुमार, तत्कालीन अंचल निरीक्षक नीलम सिन्हा और फर्जी दस्तावेज के आधार पर मुआवजा लेने के आरोपी विश्वनाथ शर्मा ने याचिका दायर की थी.
याचिकाओं पर प्रथम सत्र न्यायाधीश मनीष रंजन ने सुनवाई की. एसीबी की ओर से विशेष लोक अभियोजक सह एसटी-एससी न्यायालय के अधिवक्ता जयदेव बनर्जी ने अग्रिम जमानत का विरोध किया. एसीबी की दलीलों और मामले से जुड़े तथ्यों को देखते हुए न्यायालय ने सभी छह याचिकाएं खारिज कर दीं.
फर्जी दस्तावेज के आधार पर मुआवजा लेने का आरोप
रिंग रोड मुआवजा घोटाला मामला फर्जी दस्तावेज और मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी राशि का गलत तरीके से भुगतान कराया गया, जिससे करीब 20 करोड़ रुपये की सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया. मामले में सरकारी राशि के दुरुपयोग और मुआवजा भुगतान में अनियमितता की जांच चल रही है.
18 आरोपी पहले से जेल में
रिंग रोड मुआवजा घोटाला मामले में 18 आरोपी पहले से जेल में हैं. छह आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले में आरोपित अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना है. अदालत के आदेश से जांच एजेंसी की कार्रवाई को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है.
