धनबाद से नीरज अंबष्ट की रिपोर्ट
Dhanbad News: झारखंड के धनबाद जिले के राजगंज थाने से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इस मामले ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति की बाइक को पुलिस ने कार्रवाई के तहत जब्त कर लिया था. जब्त बाइक को थाना परिसर में रखा गया था. घायल व्यक्ति का इलाज कई दिनों तक चला, लेकिन जब वह स्वस्थ होकर अपनी बाइक लेने थाना पहुंचा, तो उसके होश उड़ गए. थाने से बाइक गायब मिली.
ग्रामीण एसपी से शिकायत
पीड़ित बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के विराजपुर मंझीलाडीह निवासी मटन प्रसाद महतो है और अभी डीजीएमएस में निजी सहायक के पद पर कार्यरत है. उन्होंने आरोप लगाया है कि थाने में मौजूद कर्मियों ने न केवल बाइक गायब होने की स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया, बल्कि उन पर दूसरी बाइक लेने का दबाव भी बनाना शुरू कर दिया. इसे लेकर गुरुवार को पीड़ित ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी को लिखित आवेदन सौंपते हुए राजगंज थाना के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. आवेदन में उसने स्पष्ट रूप से बताया है कि उसकी बाइक थाना की जिम्मेदारी में थी और उसके गायब होने के लिए पुलिस ही जवाबदेह है.
भतीजे के बयान पर दर्ज किया गया केस
मटन प्रसाद महतो ने बताया कि 21 जुलाई 2025 को ऑफिस में काम पूरा करने के बाद में अपनी बाइक ( जेएच10 सीई-5021) से घर जा रहे थे. तभी खरनी गोड़ पर एक ट्रैक्टर ने लापरवाही से उन्हें धक्का मार दिया. इससे वह बुरी तरह घायल हो गए. इस घटना में उनका हाथ और पैर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. दुर्घटना होने पर राजगंज पुलिस घटना स्थल पर पहुंची. पुलिस उनकी बाइक और धक्का मारने वाले ट्रैक्टर दोनों को राजगंज थाना ले गई. राजगंज थाना कांड सं-71/2025 उनके भतीजा मिथुन कुमार साव के लिखित बयान पर दर्ज किया गया.
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दूसरी बाइक लेने की बात कह रही पुलिस
मटन प्रसाद महतो ने आरोप लगाया है कि घायल के बाद उन्होंने धनबाद से लेकर कोलकाता तक विभिन्न अस्पताल में इलाज कराया. उसके बाद उन्होंने अपने भतीजे को राजगंज थाने से अपनी दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिल लेने के लिए भेजा. पहले तो पुलिस ने थाने में बाइक होने से इनकार किया. जब यह बाइक लेने के लिए दबाव बनाने लगे, तो पुलिस वालों ने कहा कि इसके बदले दूसरी बाइक ले लें, लेकिन उन्होंने दूसरी बाइक लेने से इनकार कर दिया और अपनी बाइक ही मांगी.
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