आमाघाटा में 2.07 एकड़ भूमि पर स्थापित होगा वन स्टॉप सेंटर, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य

धनबाद में अब महिलाओं को हिंसा से त्वरित राहत मिलेगी। आमाघाटा में 2.07 एकड़ भूमि पर एक नया वन स्टॉप सेंटर बनने जा रहा है, जो महिलाओं को 24 घंटे चिकित्सा, कानूनी और मनोसामाजिक सहायता प्रदान करेगा।

हिंसा से पीड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से धनबाद में नये वन स्टॉप सेंटर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने आमाघाटा मौजा में 2.07 एकड़ भूमि पर केंद्र निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी कर दिया है. प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है.

जिले में होगा दूसरा वन स्टॉप सेंटर

वर्तमान में धनबाद जिले में केवल एक वन स्टॉप सेंटर संचालित है. शहर में स्थित होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं को वहां तक पहुंचने में कठिनाई होती है. आमाघाटा में नया केंद्र बनने से ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को भी सहायता सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.

भूमि चयन के बाद मिली प्रशासनिक स्वीकृति

धनबाद सदर अंचल के आमाघाटा मौजा संख्या-09, खाता संख्या-89 के प्लॉट संख्या 220, 221, 222, 261, 262 और 263 की कुल 2.07 एकड़ भूमि को इस परियोजना के लिए चिह्नित किया गया है. जिला समाज कल्याण पदाधिकारी स्नेह कश्यप ने स्थल निरीक्षण के बाद भूमि को उपयुक्त पाया. अंचल अधिकारी राम प्रवेश कुमार की रिपोर्ट, ट्रेस नक्शा और भौतिक सत्यापन के आधार पर उपायुक्त ने एनओसी जारी की है.

एक ही स्थान पर मिलेंगी कई सुविधाएं

वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए समेकित सहायता केंद्र के रूप में कार्य करेगा. यहां हिंसा से प्रभावित महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी परामर्श, मनोसामाजिक काउंसलिंग, पुलिस सहायता और अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध करायी जायेंगी.

24 घंटे मिलेगी सहायता

प्रस्तावित केंद्र 24 घंटे संचालित रहेगा. इससे घरेलू हिंसा, उत्पीड़न या अन्य प्रकार की हिंसा की शिकार महिलाओं को किसी भी समय तत्काल सहायता उपलब्ध करायी जा सकेगी. प्रशासन का मानना है कि केंद्र के संचालन से महिलाओं की सुरक्षा और सहायता तंत्र को और मजबूती मिलेगी.

त्वरित मदद और सुरक्षा का मिलेगा भरोसा

वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अलग-अलग कार्यालयों और संस्थानों के चक्कर न लगाने पड़ें. केंद्र शुरू होने के बाद जिले की महिलाओं को त्वरित सहायता, परामर्श और सुरक्षा का बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा.


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By Shobhit ranjan

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