गिरिडीह. राधास्वामी संगठन की आड़ में झारखंड-बिहार समेत कई राज्यों में हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. झारखंड में संगठन के सूत्रधार बताए जा रहे मुकेश कुमार सिन्हा और उनकी पत्नी अनीषा सिन्हा ने महज चार वर्षों में करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की.
अनीषा सिन्हा ने वर्ष 2024 में गिरिडीह विधानसभा सीट से जागरूक जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था. उन्हें 585 वोट मिले थे. चुनावी शपथ पत्र में अनीषा ने अपनी चल-अचल संपत्ति करीब 4.28 करोड़ रुपये घोषित की थी. मुकेश सिन्हा के पास भी करोड़ों की चल-अचल संपत्ति होने की जानकारी सामने आयी है.
मुकेश संगठन में झारखंड प्रदेश प्रभारी और अनीषा गिरिडीह जिला प्रभारी के तौर पर काम कर रही थी. पुलिस की जांच में दोनों की भूमिका और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है.
छह साल पहले तक ईंट-बालू ढोता था मुकेश
मुकेश सिन्हा मूल रूप से दुमका का रहने वाला बताया जाता है. गिरिडीह में अनीषा सिन्हा से शादी के बाद वह यहीं रहने लगा. काम की तलाश में भटकने के बाद उसे एक डायग्नोस्टिक सेंटर में काउंटर क्लर्क की नौकरी मिली, जहां उसे करीब आठ से दस हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था. कुछ समय बाद नौकरी छूट गयी तो उसने ईंट-बालू ढुलाई का काम शुरू कर दिया.
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करीब छह वर्ष पहले मुकेश राधास्वामी संगठन से जुड़ा और इसके बाद झारखंड में संगठन का नेटवर्क फैलाने में जुट गया. आरोप है कि संगठन के नाम पर 40 से 90 प्रतिशत तक अनुदान पर वाहन और अन्य सामग्री उपलब्ध कराने का झांसा देकर मेहनतकश लोगों से डाउन पेमेंट के रूप में रकम ली गयी. बाद में उसकी पत्नी अनीषा भी गिरिडीह में संगठन का कामकाज देखने लगी.
जहां लगा था राधास्वामी का बोर्ड, अब किसी और कंपनी का कब्जा
गिरिडीह के बनखंजो में पिछले करीब चार वर्षों से राधास्वामी संगठन का मुख्य कार्यालय संचालित हो रहा था. जून में कार्यालय का शटर बंद हो गया. अब भवन का बाहरी स्वरूप भी बदल दिया गया है और इसे दूसरी कंपनी को किराये पर दिये जाने की बात सामने आयी है.
करीब 15 दिन पहले तक भवन पर राधास्वामी संगठन का बोर्ड लगा था. अब वहां से बोर्ड हटा दिया गया है और उसकी जगह 'राजेश्वरी सन्स ऑफ गिरिडीह' का बोर्ड लगा हुआ है.
संगठन का यह कार्यालय ही नहीं, बल्कि झारखंड और बिहार के कई जिलों में संचालित कार्यालय भी जून से बंद बताए जा रहे हैं. इसके बाद से लाभुक पटना और गिरिडीह का चक्कर लगा रहे हैं.
बाइक के लिए जमा किये 1.50 लाख, तीन किस्त के बाद बंद हुआ भुगतान
गिरिडीह की जुनैदा खातून की परेशानी भी इस मामले की तस्वीर सामने लाती है. उन्होंने अपने दामाद को बाइक देने के लिए राधास्वामी संगठन में करीब 1.50 लाख रुपये डाउन पेमेंट के तौर पर जमा किये थे. बाइक की कीमत करीब 2.50 लाख रुपये बतायी गयी. इसके लिए 36 किस्त जमा की जानी थी.
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जुनैदा के अनुसार, तीन किस्त जमा करने के बाद संगठन की ओर से रकम देना बंद कर दिया गया. अब उन्हें आगे की किस्तों और जमा की गयी रकम को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बताया जा रहा है कि ऐसी परेशानी सिर्फ जुनैदा खातून की नहीं है. झारखंड और बिहार के अलग-अलग जिलों में संगठन से जुड़े हजारों लाभुक अपनी रकम और वादे के मुताबिक सुविधा मिलने का इंतजार कर रहे हैं. कई लोग कार्यालय बंद होने के बाद अधिकारियों और संगठन से जुड़े लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.
