Dhanbad News : मुख्य संवाददाता, धनबाद. आनंद योग धारा द्वारा आयोजित ‘स्वयं को जानो भारत योग यात्रा’ का समापन भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच हुआ. अंतिम दिन रविवार की सुबह बिहार योग विद्यालय, विश्व योगपीठ मुंगेर के परमाचार्य स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को योगाभ्यास कराया. शाम को आइआइटी आइएसएम के पेनमैन हॉल में आयोजित सत्संग में स्वामी जी ने कहा कि योग किताबों से नहीं, बल्कि अनुभव से सीखा जाता है. पुस्तकें मार्गदर्शक हैं, लेकिन वास्तविक परिवर्तन अभ्यास और आत्म अनुभूति से आता है. कार्यक्रम के दौरान आइआइटी आइएसएम के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा, उपनिदेशक प्रो धीरज कुमार स्वामी शिव ध्यानम सरस्वती, स्वामी शिव धारा सरस्वती, स्वामी शिवचितम सरस्वती, मनोज प्रसाद, अंशुमाली, वैभव तुलसियान, शैलेश अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, हेतल पारकरिया समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.
आत्म समीक्षा से आएगा बदलाव : स्वामी जी ने कहा कि जीवन में सद्गुणों के विकास के लिए परिश्रम और नियमित चिंतन आवश्यक है. यदि व्यक्ति रोज रात में अपनी दिनचर्या और व्यवहार की समीक्षा करे, तो उसके विचार और आचरण में सकारात्मक परिवर्तन संभव है.सकारात्मक सोच ही असली तपस्या :
स्वामी जी ने आत्म शुद्धि, ध्यान, सेवा, प्रेम और दान को जीवन का आधार बताया. उन्होंने कहा कि किसी को कष्ट न पहुंचाना ही सच्ची साधना है और सकारात्मक सोच से ही जीवन का उत्थान संभव है.मन पर नियंत्रण से मिलेगी सफलता :
स्वामी जी ने एकाग्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है और जीवन की दिशा बदली जा सकती है. स्वामी जी ने संकेत दिया कि श्रद्धालुओं की इच्छा पर वर्ष 2027 में इस योग यात्रा का पुनः आयोजन किया जा सकता है. अंत में महामृत्युंजय मंत्र के सामूहिक जाप के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.मुख्य बिंदु- सुबह योगाभ्यास में बड़ी संख्या में लोगों की रही भागीदारी
– पेनमैन हॉल में भव्य सत्संग का आयोजन- आत्म चिंतन और दैनिक समीक्षा पर विशेष जोर– सेवा, प्रेम, दान और ध्यान को बताया जीवन का आधार- सकारात्मक सोच और व्यवहार परिवर्तन को बताया असली तपस्या
