धनबाद. कतरास के रामकनाली ओपी क्षेत्र के बंद परियोजना के बट्टू बाबू बंगला के समीप रविवार को कोयला चुनने के दौरान अचानक भू-धंसान होने से बड़ा हादसा हो गया. हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गयी, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गये. घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गयी. घायलों को उनके परिजन अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए ले गये. स्थानीय लोगों ने मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका जतायी है.
मृतकों में राजबाड़ी केवट टोला निवासी मूंगिया देवी (40) बतायी गयी है. दूसरी मृत महिला की पहचान झींझीपहाड़ी क्षेत्र की रहने वाली के रूप में बतायी जा रही है. घटना के बाद उसके परिजन शव को लेकर घर चले गये. हादसे में घायल बेलनजाबाद निवासी सीमा देवी (32) ने बताया कि वे लोग कोयला चुन रहे थे. इसी दौरान अचानक ऊपर से मलबा गिर पड़ा और कई लोग उसकी चपेट में आ गये.
ये भी पढ़ें: भूली में ज्वेलरी दुकान पर हंगामा, गलत तरीके से सोना खरीदने का आरोप
कोयला चुनने के दौरान अचानक धंसी जमीन
स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे के समय लोग जमीन से कोयला चुन रहे थे. इसी दौरान अचानक भू-धंसान हुआ. कोयला क्षेत्र में पुराने भूमिगत खनन क्षेत्र और कमजोर जमीन के कारण ऐसे स्थानों पर भू-धंसान का खतरा बना रहता है. हालांकि, इस घटना में जमीन धंसने का वास्तविक कारण क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
बट्टू बाबू बंगला में पहले भी हुई हैं घटनाएं
बट्टू बाबू बंगला और आसपास का इलाका पहले भी भू-धंसान की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है. ऐसे क्षेत्रों में जमीन के नीचे पुराने खनन क्षेत्र होने के कारण सतह की स्थिरता प्रभावित होने का खतरा रहता है. लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं.
क्यों खतरनाक है ऐसे स्थानों पर जाना
पुराने या भूमिगत खनन क्षेत्रों में जमीन के नीचे खाली स्थान होने की आशंका रहती है. ऊपर की सतह सामान्य दिखाई देने के बावजूद अचानक धंस सकती है. ऐसे में लोगों के लिए पुराने खनन क्षेत्रों, गोफ और दरार वाले स्थानों पर जाना जोखिम भरा हो सकता है. खासकर कोयला चुनने के लिए असुरक्षित स्थानों पर जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है.
जमीन में दरार दिखे तो तुरंत रहें दूर
यदि किसी क्षेत्र में जमीन पर अचानक दरार दिखाई दे, सतह धंसती नजर आये, पानी तेजी से जमीन के अंदर जाने लगे या किसी स्थान से धुआं अथवा गैस निकलती दिखे, तो वहां जाने से बचना चाहिए. बच्चों और मवेशियों को भी ऐसे स्थानों से दूर रखना जरूरी है. ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन और खनन प्रबंधन को तत्काल सूचना देकर स्थल की घेराबंदी तथा तकनीकी जांच करायी जानी चाहिए.
सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी जांच की जरूरत
रविवार की घटना ने एक बार फिर भू-धंसान प्रभावित कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की जरूरत को सामने ला दिया है. हादसे के बाद प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी सर्वे, जोखिम वाले स्थानों की पहचान और लोगों को ऐसे क्षेत्रों में जाने से रोकने के उपाय महत्वपूर्ण होंगे. साथ ही मृतकों और घायलों की आधिकारिक जानकारी तथा घटना के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही हादसे की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
ये भी पढ़ें: खराब ट्यूबवेलों की तुरंत होगी मरम्मत, पेयजल विभाग की इस नई योजना से ग्रामीणों को राहत
